‘मैंने हेमंत करकरे को कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा’

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लोकसभा चुनावों में सियासी बयान या यूं कहें विवादित बयान देना कोई नई बात नहीं है. आज बीजेपी की भोपाल संसदीय प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का बयान चर्चा में छाया रहा. उन्होंने मुंबई हमले में शहीद एटीसी चीफ हेमंत करकरे के खिलाफ विवादित बयान देकर सभी राजनेताओं के निशाने पर आ गई. यहां तक की उन्हें अपना बयान वापस तक लेना पड़ा. वहीं यूपी के मैनपुरी में मायावती का सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के पक्ष और पीएम मोदी के विरोध में कहा गया बयान भी चर्चा में बना रहा. ‘मैंने हेमंत करकरे को कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा’ – साध्वी प्रज्ञा, भोपाल बीजेपी प्रत्याशी आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस … Read more

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 66 फीसदी मतदान, जम्मू-कश्मीर में सबसे कम

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लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 95 संसदीय सीटों के हुए गुरूवार को केवल 66 फीसदी मतदाताओं ने अपने वोट का इस्तेमाल किया. हिंसा की छुटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्वक हुआ. सर्वाधिक मतदान पं.बंगाल में हुआ है. यहां 76.43 फीसदी मतदान हुआ है. सबसे कम जम्मू-कश्मीर में हुआ. यहां केवल 45.28 फीसदी वोटिंग हुई है. मणिपुर में 76.15 फीसदी और असम में 76.14 फीसदी मतदान हुआ है. इनके अलावा, पुडुचेरी में 75.15, छत्तीसगढ़ में 66.50, तमिलनाडू में 72 फीसदी, ओडिशा में 64, बिहार में 65.52, उत्तर प्रदेश में 62.3 और महाराष्ट्र में 62 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले. ​कर्नाटक में 61.80 … Read more

मुलायम सिंह ने खेला आखिरी चुनाव का कार्ड, कहा- भारी बहुमत से जिताना

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कहते हैं राजनीति में कोई किसी का परमानेंट दुश्मन या दोस्त नहीं होता है. यह बात आज उस समय बिल्कुल सटीक बैठी जब पिछले ढ़ाई दशक से धुर-विरोधी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती एक मंच पर साथ दिखे. यह घटना भारतीय सियासत की ऐतिहासिक तस्वीर बन गई जिसका गवाह बना उत्तरप्रदेश का मैनपुरी. यहां चुनावी महारैली के मंच पर सपा नेता पिता-पुत्र मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच में बसपा सुप्रीमो मायावती बैठी थीं. दोनों दिग्गज नेता एक-दूसरे की ओर देख मुस्कुराए और एक-दूसरे के संबोधन पर तालियां भी बजाई. सपा और बसपा के बीच 1995 के बाद ऐसी तकरार हो गई थी कि उसे … Read more

ममता बनर्जी की बायोपिक ‘बाघिनी’ पर लग सकती है रोक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ के बाद अब पं.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बायोग्राफी पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. इस फिल्म का नाम ‘बाघिनी’ है जो 3 मई को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. कथित तौर पर इस फिल्म को ममता बनर्जी की जीवनी से प्रेरित बताया जा रहा है. बीजेपी ने निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया है कि बंगाल में चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए. इस बारे में निर्वाचन आयोग ने राज्य के निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है. पीटीआई की एक खबर के मुताबिक, बीजेपी ने आयोग से अनुरोध … Read more

पीएम मोदी पर तेजस्वी यादव का वार, कहा – अगड़े महोदय अचानक हो गए पिछड़े

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चुनावी रंग देश की सियासत को हर रोज नए रंग में रंगता जा रहा है. हाल ही की चुनावी रैलियों में पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को “सारे मोदी चोर है ” बयान पर घेरा जा रहा है और राहुल द्वारा खुद सहित पूरे पिछड़े समाज को गाली देने की बात कही जा रही है. इसी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी पर पलटवार किया है. यादव ने ट्वीट कर पीएम पर तंज कसा है कि पिछले 55 साल तक अगड़ी जाति में रहने वाले मोदी जी एक दिन अचानक पिछड़े बन गए. जिसके बाद देश की सियासत में नया उबाल लाजमी … Read more

जयपुर ग्रामीण सीट पर जातिगत समीकरणों में उलझे राठौड़-पूनिया

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लोकसभा चुनाव में राजस्थान की हॉट सीट में शुमार जयपुर ग्रामीण सीट से देश के दो दिग्गज खिलाड़ी राजनीति के मैदान में आमने-सामने हैं. बीजेपी ने यहां वर्तमान सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को फिर से मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने चूरू के सादुलपुर से विधायक कृष्णा पूनिया पर भरोसा जताया है. जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र में कोटपूतली, बानसूर, विराटनगर, शाहपुरा, जमवारामगढ़, झोटवाड़ा, आमेर और फुलेरा विधानसभा क्षेत्र हैं.

यहां जातीय समीकरण चुनाव के नतीजों पर भारी रहते हैं. ऐसे में राठौड़ के लिए यहां फिर से कमल खिलाना आसान नहीं लग रहा है. जातीय गणित पर गौर करें तो जयपुर ग्रामीण सीट आमतौर पर जाट बाहुल्य मानी जाती है. यहां की जनसंख्या करीब 12 लाख के करीब है. यहां साढ़े 4 लाख जाट, 1 लाख 60 हजार गुर्जर, 1 लाख 50 हजार यादव, एक लाख मुस्लिम वोटर हैं. वहीं तीन लाख से अधिक एसटी-एससी मतदाता मौजूद हैं. जाट बाहुल्य सीट होने से यहां जाटों का प्रतिनिधित्व भी ज्यादा महत्व रखता है.

साल 2009 में परिसीमन के बाद बनी जयपुर ग्रामीण सीट से कांग्रेस प्रत्याशी लालचंद कटारिया से बीजेपी के राव राजेन्द्र सिंह का मुकाबला हुआ था जिसमे कटारिया ने लगभग 51 हजार मतों से जीत हासिल की थी और केंद्र में मंत्री बनाए गए थे. 2014 में हुए लोकसभा के चुनांव में मोदी लहर के चलते लालचंद कटारिया चुनावी मैदान में नहीं उतरे. उनकी जगह कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी को उतारा, जिन्हें भाजपा के प्रत्याशी राज्यवर्द्धन सिह राठौड़ से करीब सवा तीन लाख वोटों से करारी हार मिली. इस जीत ने राजनीति में नए नवेले राठौड़ को सीधे दिल्ली का टिकट दे दिया और केंद्र मंत्री की सीट भी संभला दी.

जातिगत समीकरणों का सीधा-सीधाअसर विधानसभा सीटों पर भी देखा जा सकता है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम पर एक नजर डाले तो वर्तमान में शाहपुरा से निर्दलीय आलोक बेनीवाल, आमेर से सतीश पूनिया और झोटवाड़ा से लालचन्द कटारिया सहित तीन जाट विधायक हैं. कांग्रेस से दो गुर्जर विधायक इंद्र राज गुर्जर, शकुंतला रावत और एक यादव विधायक है. अगर बात करें 2013 के विधानसभा चुनावों की तो कांग्रेस के टिकट पर कोटपूतली से राजेन्द्र यादव और बानसूर से शकुंतला रावत विजयी होकर विधानसभा पहुंचे जबकि शाहपुरा से राव राजेन्द्र, विराटनगर से फूलचंद भिंडा, जमवारामगढ़ से जगदीश नारायण मीणा, फुलेरा से निर्मल कुमावत, झोटवाड़ा से राजपाल सिंह बीजेपी खेमे से जीते. आमेर से किरोड़ी लाल मीणा की पार्टी से नवीन पिलानिया विजयी रहे थे.

अब बात करें वर्तमान लोकसभा चुनावों की तो पहली बार चुनाव लड़कर केंद्र सरकार में पहुंचे राज्यवर्धन सिंह के लगातार बढ़ रहे कद और पॉपुलर्टी को देखते हुए कांग्रेस ने जातिगत रणनीति के साथ मैडल खेल खेलना ही उचित समझा. इसलिए सोची समझी रणनीति के तहत जाट नेता और ओलंपिक मैडल विजेता कृष्णा पूनिया को इस सीट से उतारा. इसके बाद मुकाबला जितना लग रहा था, राठौड़ के लिए उससे कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. विधानसभा चुनावों में विराटनगर सीट पर दूसरे व तीसरे नम्बर रहे कुलदीप धनकड़ और फूलचंद भिंडा जाट समाज से आते हैं. ऐसे में पूनिया का पलड़ा और भारी होते नजर आ रहा है.

स्थानीय राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक मानना है कि गुर्जर नेता होने के कारण अगर खुद सचिन पायलट इस सीट पर आकर कृष्ण पूनिया का समर्थन करते हैं तो गुर्जर वोट बैंक भी पूनिया को मिल जाएगा और जीत निश्चित होती नजर आएगी. ग्रामीण क्षेत्र की इस सीट पर पेयजल की समस्या को देखते हुए वैसे भी इस क्षेत्र की जनता राठौड़ से थोड़ी नाराज है जिसका फायदा भी पूनिया को मिल सकता है. इन सबसे अलावा, कृष्णा पूनिया को एक महिला और स्थानीय होने का फायदा मिलेगा, इसमें तो कोई संशय नहीं होना चाहिए. क्षेत्र में सांसद कोष की पूरी राशि का इस्तेमाल न किए जाने की खबरों से भी राठौड़ को थोड़ी परेशानी हुई है. यही वजह है कि राज्यवर्धन ने अपने चुनावी प्रचार की शुरूआत कोटपुतली और विराटनगर से की है ताकि जनता का रूख जान सकें.

इन सब बातों को देखते हुए अब बीजेपी के पास दलित वोट बैंक हथियाने के अलावा कोई रास्ता शेष नहीं बचा है लेकिन यह आसान काम नहीं है. खैर, जो भी हो परिणाम अगले महीने में सामने आ ही जाएगा. उससे पहले तो चुनावी प्रचार और शक्ति प्रदर्शन के जरिए ही परिणाम सोचना जाना ठीक है. लेकिन फिर भी पिछले लोकसभा चुनावों में आशा के विपरित राठौड़ के सामने सीपी जोशी का जो हश्र हुआ था, उसे देखते हुए पूनिया के आने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में एक जोश का संचय तो हुआ ही है.

पत्नी के प्रचार पर घिरे शत्रुघ्न सिन्हा, कांग्रेस प्रत्याशी ने जताया एतराज

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अक्सर पार्टी विरोधी बयान देने के बाद बीजेपी छोड़ कांग्रेस का हाथ थामने वाले शुत्रुघ्न सिन्हा अब फिर पार्टी की खिलाफत पर उतर आए हैं. दरअसल, यूपी की लखनऊ लोकसभा सीट पर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा चुनाव मैदान में हैं और गुरूवार को नामाकंन के दौरान शत्रुघ्न अपनी पत्नी के साथ दिखे और तो और उन्होंने पूनम सिन्हा के रोड़ शो में भी शामिल होकर वोट मांगे. इस पर लखनऊ कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद कृष्णम भड़क गए और शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी धर्म निभाने की सलाह दे डाली. पार्टी धर्म निभाएं सिन्हा – कृष्णम बीजेपी को अलविदा कह कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न … Read more

दिग्विजय सिंह के सामने कितनी बड़ी चुनौती साबित होंगी साध्वी प्रज्ञा?

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बीते बुधवार को बीजेपी ने 22वीं लोकसभा प्रत्याशी सूची में चार उम्मीदवारों की घोषणा की. इनमें सबसे चकित करने वाला नाम भोपाल से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर था. साध्वी प्रज्ञा ने कल ही बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी और भोपाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी. बीजेपी ने यहां हिंदुत्व कार्ड खेला है.जिसके बाद अब साध्वी का मुकाबला दिग्गज कांग्रेसी दिग्विजय सिंह से होगा. भोपाल संसदीय सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है. पिछले 3 दशक से बीजेपी का इस सीट पर एक क्षत्र राज है. उससे पहले ये सीट कांग्रेस के लिए मुफीद मानी जाती थी. लेकिन साल 1984 के बाद कांग्रेस कभी यहां विजयी पताका नहीं पहरा … Read more

बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेंका जूता

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दिल्ली में बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी प्रवक्ता पर जूता फेंकने का मामला सामने आया है. मीडिया को संबोधित कर रहे बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव पर एक शख्स ने जूता दे मारा. गनीमत रही कि जूता उनके कंधे को छूकर निलक गया. जूता फेंकने वाले व्यक्ति को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तुरंत दबोच लिया. इसके बाद उसे पुलिस को सौंप दिया. #WATCH Delhi: Shoe hurled at BJP MP GVL Narasimha Rao during a press conference at BJP HQs .More details awaited pic.twitter.com/7WKBWbGL3r — ANI (@ANI) April 18, 2019 पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि जूता फेंकने वाले शख्स का नाम डॉ. शक्ति भार्गव है और वो उत्तर प्रदेश … Read more