लोकसभा चुनाव: तीसरे चरण का मतदान आज, 15 राज्यों की 116 सीटों पर वोटिंग

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लोकसभा चुनावों का तीसरा चरण आज से शुरू हो गया है. 17वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनावों में 14 राज्यों की 115 सीटों पर मतदान होगा. इन सीटों पर 1612 प्रत्याशियों की किस्मत दाव पर लगी है. 142 महिला उम्मीदवार भी मैदान में हैं. मतदाना सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक अपने मत का इस्तेमाल कर सकेंगे. त्रिपुरा की एक सीट पर भी वोटिंग होगी. इस सीट पर दूसरे चरण में वोटिंग रद्द कर दी गई थी. इन राज्यों की निम्न सीटों पर होंगे मतदान गुजरात – 26 केरल – 20 कर्नाटक – 14 महाराष्ट्र – 14 उत्तर प्रदेश – 10 छत्तीसगढ़ – 6 ओडिशा – 6 … Read more

पीएम मोदी दूसरे दिन भी मेवाड़ के दौरे पर, कांग्रेस पर किये जमकर वार

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एक के बाद एक चरण में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है और राजनीतिक पार्टियां भी बाकी बची सीटों पर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. पार्टी के स्टार प्रचार धुंआधार रैलियों के साथ-साथ चुनावी सभाओं में लगे हैं. मतदाताओं के मन तक पहुंचने के लिए हर जुगत लगाई जा रही है और हर क्षेत्र तक पार्टी के शीर्ष नेताओं का भी पहुंचना जारी है. इसी क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी आज दूसरे दिन भी प्रदेश में मेवाड़ के दौरे पर आए. जहां उदयपुर में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी कांग्रेस पर जमकर बरसे और देश में एक मजबूत सरकार बनाने की बात कही. पीएम … Read more

‘सोनियाजी को आतंकवादियों की मौत पर रोना आया, शहादत पर नहीं’

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लोकसभा चुनावों का कारवां जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बयानबाजी और जुमले भी गति पकड़ते जा रहे हैं. आज का दिन भी कुछ इसी तरह बीता. वैसे तो पूरे दिनभर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का ‘ईद वाले बम’ बयान सुर्खियों में रहा लेकिन अमित शाह का सोनिया गांधी पर ‘बाटला हाउस’ बयान चर्चा में रहा. आजम खान के बेटे का जया प्रदा पर तंज भी खूब उछला. वरूण गांधी की मीठी चाय तो उनके बयान के बाद और मीठी हो गई. ‘सोनियाजी को आतंकवादियों की मौत पर रोना आया, शहादत पर नहीं’ अमित शाह, कोलकत्ता, पं.बंगाल से बाटला हाउस का जब एनकाउंटर हुआ था, सोनियाजी को रोना … Read more

आखिर क्यों है सीकर में कांग्रेस की जीत का मजबूत दावा

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सीकर, राजस्थान में एकमात्र ऐसी सीट है जिसपर कांग्रेस ही नहीं बल्कि बीजेपी नेताओं का भी मानना है कि कांग्रेस की जीत का खाता यहीं से खुलेगा. जब से सुभाष महरिया को टिकट मिली, तभी से यही चर्चा है कि कांग्रेस यहां से एक लाख वोटों से जीत सकती है. आखिर ऐसा क्या है? इसके लिए पॉलिटॉक्स न्यूज ने सीकर के गांव और शहरों का दौरा करते हुए आम लोगों की राय जानी और इसकी तह में जाने की कोशिश की. इस दौरान बड़ी वजह यही सामने आई कि सीकर हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रहा है. सूबे में सरकार किसी की बने, यहां से कांग्रेस के दो से तीन विधायक जीतकर जरूर आते हैं और विधानसभा का टिकट कटाते हैं.

दोनों दलों ने जाट पर खेला दांव
लोकसभा चुनाव में जातिगत समीकरण साधने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही जाट प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. बीजेपी ने मौजूदा सांसद सुमेधानंद सरस्वती और कांग्रेस ने सुभाष महरिया पर दांव खेला है. यहां जाट जाति के वोट यहां काफी निर्णायक माने जाते हैं लेकिन बीजेपी प्रत्याशी पूरी तरह से मोदी लहर के ही सहारे हैं. सुमेधानंद के साथ बीजेपी संगठन और पार्टी के दिग्गज नेता सिर्फ अनमने मन से जा रहे हैं. खुद महाराज को भी इस बात का पूरा-पूरा एहसास है. लिहाजा उनके प्रचार की कमान पूरी तरह से संघ और उसके आनुषांगिक संगठनों ने संभाल रखी है.

भगवा वस्त्र धारण किए सुमेधानंद सरस्वती पूरी तरह से राष्ट्रवाद और सेना के शौर्य के सम्मान की चर्चा अपने भाषणों में कर रहे हैं. उधर सियासत और मैनेजमेंट के महारथी सुभाष महरिया के लिए हर हालात मुफीद नजर आ रहे हैं. गुटबाजी का डर भी उनके सामने नहीं है. लिहाजा पूरी टीम के साथ चुनावी प्रचार में जोश-ख़रोश से जुटे हुए हैं. बता दें कि कांग्रेस के पक्ष में यह बात भी है कि इस बार तो विधानसभा चुनाव में बीजेपी का जिले से सूपड़ा ही साफ हो गया था. हालांकि चौमूं से एकमात्र भाजपा विधायक जरूर है.

6 विधानसभा में कांग्रेस को बढ़त के आसार
आगे जब पॉलीटॉक्स ने ‘कांग्रेस ही क्यों जीत सकती है’ पर चर्चा की तो सामने आया कि सीकर संसदीय क्षेत्र की आठ में से 6 विधानसभा सीटों से कांग्रेस बढ़त ले सकती है. इसके अलावा श्रीमाधोपुर और चौमूं विधानसभा क्षेत्र में खुद कांग्रेस प्रत्याशी पीछे रहने की बात स्वीकार कर रहे हैं क्योंकि चौमूं से बीजेपी विधायक है और हाल ही में हुए हिंदू-मुस्लिम विवाद के बाद स्थिति बदली हुई है. वहीं श्रीमाधोपुर में गुर्जर समाज सचिन पायलट को सीएम नहीं बनाने की नाराजगी के चलते बीजेपी के साथ दिख रहा है.

बता दें कि यहां करीब बीस से पच्चीस हजार गुर्जर वोटर्स हैं. विधायक दीपेंद्र सिंह सुभाष महरिया से सचिन पायलट की सभा करवा गुर्जर वोटर्स को मैनेज करने की बात भी कह चुके है. वहीं सीकर शहर से भी कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष महरिया के संघ की रणनीति के चलते थोड़ा सा पीछे रहने के आसार है. यहां विधानसभा चुनाव के दौरान महरिया की विधायक राजेन्द्र पारीक से कथित नाराजगी का फैक्टर काम कर रहा है. वहीं लक्ष्मणगढ़, खंडेला, नीमकाथाना, धोद और दांतारामगढ़ से महरिया को अच्छी बढ़त मिलने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं.

साधु की सियासत संघ के भरोसे
बात करें बीजेपी प्रत्याशी की तो पार्टी द्वारा सुमेधानंद सरस्वती को टिकट देने से जिले के बीजेपी नेता बेहद नाराज हैं. संघ और योगगुरू बाबा रामदेव की दखल के चलते सुमेधानंद एक बार फिर टिकट लाने में कामयाब हो गए. सुमेधानंद की पूरी रणनीति संघ ने अपने हाथ में ले ली है. लिहाजा मैनेजमेंट के माहिर कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष महरिया को परास्त करने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट का सहारा लिया जा रहा है. सुबह-सुबह पार्क में लोगों से संघ के पदाधिकारी मुलाकात कर रहे हैं. वरिष्ठ नागरिकों से भी संपर्क में बने हुए हैं. तो इमरजेंसी में बंद हुए लोगों से भी फीडबैक लिया जा रहा है. उसके बाद से ही सुमेधानंद राष्ट्रवाद और मोदी के गुणगान पर सवार हुए है.

एक लाख के आस-पास जीत का अंतर
सीकर संसदीय सीट पर कांग्रेस द्वारा पक्की जीत के दावों के बीच शेखावाटी के सट्टा मार्केट, आमजन की चर्चा और सियासी गणित के जानकारों की मानें तो इस सीट पर परिणाम बड़ा रहने वाला है, जिसमें जीत का अंतर 70 हजार से लेकर एक लाख वोटों तक के बीच रहेगा. चुनावी एक्सपर्ट्स भी कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे हैं जिसमें संसदीय क्षेत्र की 6 विधानसभा सीट पर 10 से 15 हजार वोटों की बढ़त कांग्रेस को मिलने का आंकलन करते हुए परिणाम के अंतर की बात कही जा रही है.

महरिया-सरस्वती का करो या मरो जैसा चुनाव
चाहे बीजेपी प्रत्याशी सुमेधानंद सरस्वती हो या कांग्रेस के सुभाष महरिया, ये चुनाव सियासी नज़रिए से दोनों के लिए ही अहम माना जा रहा है.  महरिया लगातार चुनाव हारते आ रहे हैं इसलिए उनकी राजनीतिक विरासत दांव पर है. वहीं महाराज सरस्वती चुनाव में शिकस्त पाते हैं तो फिर सियासत नहीं साधु बनकर ही गुजारा करना होगा. सियासी सूत्रों के अनुसार, स्थानीय बीजेपी नेता इसी फैक्टर के चलते साधु का साथ नहीं दे रहे हैं.

क्या माकपा होगी गेमचेंजर?
इस बार भी माकपा ने सीकर से पूर्व विधायक अमराराम को मैदान में उतारा है. वे कर्ज माफी और बिजली की दरें सस्ती करने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे हैं. ऐसे में उन्हें धोद, लक्ष्मणगढ़ और दांतारामगढ़ में अच्छे वोट मिलने की उम्मीदें है लेकिन फिर भी उनकी जीत असंभव नजर आ रही है. हां, गेमचेंजर होकर किसी एक प्रत्याशी का खेल जरूर बिगाड़ सकते हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कॉमरेडों के फिक्स वोट हैं और वो उनको जाने ही है.

राजस्थान: कहीं कम तो कहीं ज्यादा, लेकिन मोदी लहर है बरकरार

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राजस्थान में कांग्रेस उम्मीदवार, उनके समर्थक और वोटर्स भले ही यह दावा कर रहे है कि इस बार मोदी मैजिक या कोई लहर नहीं है, लेकिन धरातल पर उनके इन दावों में दम नहीं है. पॉलिटॉक्स न्यूज ने मारवाड़ से लेकर शेखावाटी तक और नहरी क्षेत्र से लेकर पूर्वी राजस्थान में जब हर सीट पर जाकर मतदाताओं को टटोला तो यही निकलकर आया की मोदी लहर अभी भी जारी है. साल 2014 की तरह लोगों को अब भी मोदी पर भरोसा है. राजस्थान की कई सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों को लेकर गहरी नाराजगी भी सामने आई है, लेकिन वोटर्स को प्रत्याशी से नहीं सिर्फ मोदी से मतलब है.

वहीं, बीजेपी प्रत्याशी से नाराज मतदाताओं का साफ कहना है कि पांच साल में हमारे सांसद हमें पूछने तक नहीं आए तो उनके विकास कार्य क्या गिनाएं, लेकिन हमें तो मोदी को जिताना है. इसलिए प्रत्याशी कैसा है, यह बात हमारे लिए मायने नहीं रख रही. इसे देखते हुए बीकानेर, झुंझुनूं, जोधपुर, सीकर, टोंक और श्रीगंगानर के बीजेपी प्रत्याशी की अगर जीत होगी तो सिर्फ मोदी के नाम पर ही होगी. वोटर्स का कहना है कि मोदी जैसे नेता को एक बार प्रधानमंत्री और बनना चाहिए. इसके पीछे लोगों का तर्क है कि पांच साल मोदी के लिए कम थे, इसलिए एक बार मौका देना बेहद जरुरी है.

यही कारण है कि मोदी मैजिक फैक्टर क्या कमाल कर पाएगा यह हर बीजेपी उम्मीदवार की जुबान से सुनने को मिल जाएगा. हर बीजेपी प्रत्याशी अपने भाषण में सिर्फ और सिर्फ मोदी का बखान कर रहा है. कोई भी प्रत्याशी अपने पांच साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने जिक्र तक नहीं करता. प्रत्याशियों की जुबां पर बस मोदी-मोदी ही है. ग्राउंड पर अस्सी फीसदी लोग फिर से मोदी सरकार बनने का ही दावा कर रहे हैं. जो लोग मोदी से थोड़े से नाराज हैं वे भी कहते हैं कि यह बात सही है कि मोदी कोई जादूगर तो नहीं है, जो एक बार में सब ठीक कर दे, इसलिए एक और मौका देकर परख लेते हैं.

आखिर कैसे है मोदी लहर बरकरार?
पॉलीटॉक्स न्यूज ने चुनावी कवरेज के दौरान करीब हजार लोगों की राय जानी. जब उनसे हमने सवाल किए कि मोदी ही क्यों, तो लोगों के ये तर्क और दलीलें थी कि मोदी ने दुनिया में देश का नाम रोशन किया है. हमारे पड़ोसी पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी है. मोदी जब बोलता है तो ऐसा लगता है शेर दहाड़ता है. मोदी चेहरे का जादू देखिए कि लोग जीएसटी औऱ नोटबंदी से हुई अपनी परेशानी को भी भूल गए हैं. साथ ही लोग कहते हैं कि आज नहीं तो कल इसके अच्छे परिणाम आएंगे. कई लोग तो मोदी के पहनावे और भाषण शैली के भी कायल है. सबसे ज्यादा लोग मोदी के आक्रामक तेवर वाले भाषणों के जबरदस्त प्रशंसक हैं.

टक्कर की सीटों पर चलेगा मोदी मैजिक!
जानकारों की मानें तो जिन सीटों पर बीजेपी कांटे के मुकाबले में है, वहां मोदी नाम से उनकी जीत की नैया पार हो सकती है. उदाहरण के तौर पर बीकानेर में मतदाताओं में बीजेपी प्रत्याशी अर्जुनराम मेघवाल से नाराजगी देखने को मिल रही है. देवी सिंह भाटी जैसे नेता ने खुली बगावत कर दी है तो कई बीजेपी नेता और संगठन पदाधिकारी अर्जुन के खिलाफ हैं, लेकिन मोदी के बलबूते फिर भी अर्जुन मेघवाल रण में डटे हुए हैं. तमाम विरोध के बावजूद अगर अर्जुन ने जीत की चिड़िया पर निशाना लगा लिया तो इसका क्रेडिट सिर्फ और सिर्फ मोदी को ही जाएगा. खुद अर्जुन को इसका एहसास भी है, इसलिए वो अपनी सभाओं में मोदी धुन के गाने और जुबां में मोदी का यशोगान करने से नहीं चूकते.

जहां मोदी लहर बेअसर वहां संघ-शाह की रणनीति 
अगर किसी सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ काफी नकारात्मक माहौल है तो उस पर सीधे अमित शाह और संघ नजर बनाए हुए हैं. उदाहरण के तौर पर टोंक-सवाई माधोपुर और बाड़मेर सीट पर फिलहाल कांग्रेस जातिगत और सियासी समीकरण से बेहद मजबूत हैं. लिहाजा इन सीटों पर संघ और शाह को विशेष रणनीति बनाई है. यही वजह है कि मोदी की बाड़मेर में सभा करानी पड़ी. वहीं, आपने देखा होगा कि चुनाव से पहले मोदी ने सबसे पहले सभा टोंक में ही की थी. तो कह सकते हैं कि राजस्थान में बीजेपी पूरी तरह से मोदी लहर पर ही सवार है और जहां लहर कमजोर है वहां शाह-संघ की रणनीति के नुस्खे आजमाए जा रहे हैं.

यूपी: महागठबंधन की संयुक्त जनसभा रामपुर-फिरोजाबाद में, शिवपाल यादव होंगे निशाने पर

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उत्तरप्रदेश में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव फिरोजाबाद और रामपुर में आज साझा रैली करेंगे. फिरोजाबाद में मायावती और अखिलेश बसपा-सपा गठबंधन प्रत्याशी अक्षय यादव के लिए वोट मागेंगे. अक्षय मुलायम के भाई रामगोपाल के पुत्र हैं जिनका मुकाबला उनके चाचा शिवपाल यादव से होगा. फिरोजाबाद जनसभा में सपा-बसपा के निशाने पर मुख्य तौर पर शिवपाल यादव ही होंगे. अखिलेश से अदावत के बाद शिवपाल ने चुनाव से पूर्व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया है. शिवपाल ने प्रदेश की अन्य सीटों पर भी अपने प्रत्याशी खड़े किए है. बीजेपी ने यहां से चन्द्रसेन चादौन को अपना प्रत्याशी बनाया है. यह भी पढ़ें: 24 साल बाद चुनावी … Read more