PoliTalks News
बायोग्राफी

सोनम वांगचुक की जीवनी | Sonam Wangchuk Biography in Hindi

18 जुलाई 2026
साझा करें:
सोनम वांगचुक की जीवनी | Sonam Wangchuk Biography in Hindi
इस लेख में हम आपको सोनम वांगचुक राय की जीवनी (Sonam Wangchuck Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.

Sonam Wangchuk Latest News – सोनम वांगचुक एक इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं. पिछले साल लद्दाख आंदोलन के दौरान उन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया और राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में कई महीनों तक रखा गया. हालांकि बाद में NSA हटा दिया गया और उन्हें रिहा कर दिया गया. रिहाई के बाद सोनम वांगचुक ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता चुना. इस बार उनका मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बने परीक्षा घोटाले और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. शनिवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह पर की गई, जबकि समर्थकों का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ हटाया गया। फिलहाल वांगचुक अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस लेख में हम आपको सोनम वांगचुक राय की जीवनी (Sonam Wangchuck Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.

सोनम वांगचुक की जीवनी (Sonam Wangchuck Biography in Hindi)

पूरा नाम सोनम वांगचुक
उम्र 60  साल
जन्म तारीख 1 जुलाई 1963
जन्म स्थान लद्दाख के लेह
शिक्षा बी.टेक. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग)
कॉलेज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर
वर्तमान पद
व्यवसाय राजनीतिक
राजनीतिक दल न्यू लद्दाख मूवमेंट
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पिता का नाम सोनम वांग्याल
माता का नाम त्सेरिंग वांगमो
पत्नी का नाम गीतांजलि जे अंग्मो
बेटें का नाम
बेटी का नाम
स्थाई पता
वर्तमान पता
फोन नंबर
ईमेल

सोनम वांगचुक का जन्म और परिवार (Sonam Wangchuck Birth & Family)

सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के लेह जिले के अलची में हुआ था. सोनम वांगचुक के पिता का नाम सोनम वांग्याल था तो उनकी माता का नाम त्सेरिंग वांगमो था. सोनम वांगचुक का विवाह गीतांजलि जे अंग्मो से हुआ है.

सोनम वांगचुक की शिक्षा (Sonam Wangchuck Education)

सोनम वांगचुक अपनी शिक्षा को लेकर विशेष चर्चा में रहे है. वांगचुक ने 1987 में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर (तत्कालीन आरईसी श्रीनगर) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. किया. इंजीनियरिंग स्ट्रीम चुनने को लेकर उन्हें अपने पिता से मतभेद हो गया परिणाम यह हुआ कि सोनम को अपनी शिक्षा का खर्च स्वयं ही उठाना पड़ा. बाद में वांगचुक ने 2011 में फ्रांस के ग्रेनोबल स्थित क्रेटर स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में अर्थन आर्किटेक्चर में दो साल की उच्च शिक्षा भी ली थी.

सोनम वांगचुक का का शुरूआती जीवन (Sonam Wangchuck Early Life)

सोनम वांगचुक एक इंजिनियर है, लेकिन गांव में विद्यालय नहीं होने के कारण सोनम 9 वर्ष तक भी शिक्षा से विहीन रहे. वांगचुक की माँ ने उन्हें उस उम्र तक उनकी अपनी मातृभाषा में सभी मूल बातें सिखाईं. वर्ष 1975 में, उनके पिता जम्मू कश्मीर सरकार में चुने गए जहाँ वे मंत्री बने. 9 साल की उम्र में, वांगचुक परिवार के साथ श्रीनगर चले गए और वहाँ एक स्कूल में नाम लिखाया. चूँकि सोनम ने अब तक जो भी घर में पढ़ा था वह अपनी लद्दाखी भाषा में पढ़ा था, दूसरी ओर वे कश्मीर की भाषा को भी समझने में असमर्थ थे. इस कारण स्कूल में अन्य विद्यार्थी वांगचुक का मजाक उड़ाते थे. उन्हें बेवकूफ समझते थे. जब स्थिति वांगचुक के लिए असहनीय हो गयी तब वांगचुक वर्ष 1977 में अकेले ही दिल्ली भाग गए.

1988 में जब सोनम वांगचुक ने स्नातक किया तब अपने भाई और पाँच साथियों के साथ मिलकर लद्दाख के छात्र शैक्षिक और सांस्कृतिक आंदोलन (SECMOL) की शुरुआत की. इसके माध्यम से सरकारी शिक्षा विभाग और गाँव की जनता के सहयोग से ऑपरेशन न्यू होप शुरू किया.

वांगचुक ने 2005 में लद्दाख में प्रिंट पत्रिका लाडाग्स मेलोंग की स्थापना की और स्थापना के बाद वह उसके उसके संपादक बन गए. उस समय तक यह राज्य का इकलौता प्रिंट पत्रिका था. इस समय तक सोनम का नाम देशभर में विख्यात हो चुका था. इसी कारण वह सरकार की नजर में भी आ गए थे. फिर इसी के बाद वर्ष 2001 में वांगचुक को हिल काउंसिल सरकार में शिक्षा के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया.

2002 में, अन्य एनजीओ प्रमुखों के साथ मिलकर, उन्होंने लद्दाखी एनजीओ के एक नेटवर्क ‘लद्दाख वॉलंटरी नेटवर्क’ की स्थापना की और 2005 तक सचिव के रूप में इसकी कार्यकारी समिति में कार्य किया. उन्हें ‘लद्दाख हिल काउंसिल सरकार’ के विज़न डॉक्यूमेंट लद्दाख 2025 की मसौदा समिति में भी नियुक्त किया गया और 2004 में शिक्षा और पर्यटन पर नीति तैयार करने का काम सौंपा गया. दस्तावेज़ को औपचारिक रूप से 2005 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा लॉन्च किया गया था.

सोनम वांगचुक अब तक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके थे. इसी कारण उन्हें देश विदेश से सहयोग प्राप्त होने लगा. इसी कड़ी में वर्ष 2007 से लेकर 2010 तक वांगचुक डेनिश एनजीओ एमएस के लिए एक शिक्षा सलाहकार के रूप में भी काम किया.

सोनम वांगचुक का राजनीतिक करियर (Sonam Wangchuck Political Career)

सोनम वांगचुक ने वर्ष 2013 में लद्दाख न्यू लद्दाख मूवमेंट (एनएलएम) और ग्रीन पार्टी का गठन किया था. इसका उद्देश्य स्थायी शिक्षा, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए काम करना था. इसका अन्य उद्देश्य स्थानीय राजनीतिक नेताओं को एक बैनर के तहत एकजुट करना भी था.

सोनम वांगचुक को लेकर घटनाक्रम

सोनम वांगचुक भले ही लंबे समय तक देश में हीरो बनकर खूब प्रसिद्धि पायी हो पर आज उनकी पहचान एक विलेन वाली हो गई है. हाल में हुई लेह की हिंसा में पटकथा लिखने में उन्ही का नाम आ रहा है. उनका पाकिस्तानी व बांग्लादेशी कनेक्शन भी देखने को मिल रहा है. पुलिस को उनके विरुद्ध ठोस सुराग भी हाथ लगा है. दूसरी ओर, सोनम का आंदोनल करने का पुराना इतिहास रहा है. सोनम वांगचुक अपनी विदेशी फंडिंग को लेकर भी जांच के दायरे में है.

इसी के बाद सोनम वांगचुक को ‘नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA)’ के तहत गिरफ्तार किया गया है. सोनम को अरेस्ट करके जोधपुर सेन्ट्रल जेल भेज दिया गया है. इस धारा में गिरफ्तार मुजरिम को बेल मिलना लगभग असंभव हो जाता है. इस धारा के अंतर्गत मुजरिम को बिना किसी आरोप के एक साल तक जेल में रखा जाता है. साथ ही, ऐसे मुजरिम पर जेल में भी विशेष सेल बनायी जाती है, ताकि ये वहां से भी किसी खरतनाक घटना को कही अंजाम ने दे दे.


एक समय शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चर्चा में रहने वाले सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार वजह है उनका आंदोलन और भूख हड़ताल. पिछले कई दिनों से वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (sonam wangchuk hunger strike reason) पर बैठे थे. 21वें दिन (sonam wangchuk hunger strike how many days) उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई. पुलिस का कहना है कि यह कदम डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया, जबकि उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां से हटाया गया.

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. एक पक्ष इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश मान रहा है।

फिलहाल सोनम वांगचुक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में उनके आंदोलन और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी.

इस लेख में हमने आपको सोनम वांगचुक की जीवनी (Sonam Wangchuck Biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है. अगर आपका कोई सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं.

PoliTalks News - Authoritative News Portal