



मंत्री के.के.बिश्नोई ने कहा- नहीं भूलेंगे अमृता देवी का बलिदान, खेजड़ी की सुरक्षा के लिए लिखित आश्वासन देगी सरकार, पर्यावरण की रक्षा के लिए बनाया जाएगा सख्त कानून
बीकानेर में पिछले 4 दिनों से जारी खेजड़ी बचाओ आंदोलन को लेकर आखिर सरकार के दखल के बाद गतिरोध टूटता नजर आ रहा है. कलेक्ट्रेट पर चल रहे महापड़ाव के बीच गुरुवार को आंदोलनकारियों से वार्ता करने के लिए मंत्री के.के. बिश्नोई, जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई, विधायक पब्बाराम विश्नोई धरना स्थल पर पहुंचे. जिला प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच पहले हुई वार्ता में कोई हल निकलने के बाद सरकार की ओर मंत्री के.के.विश्नोई के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल धरना स्थल पर पहुंचा. मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाया है.
मंत्री केके विश्नोई ने मंच से कहा कि सरकार खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है. उन्होंने घोषणा की कि आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार लिखित में आश्वासन देगी, ताकि भविष्य में खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. मंत्री विश्नोई ने बिश्नोई समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि 'वर्तमान में केंद्र से लेकर प्रदेश तक की सरकार मां अमृता देवी के बलिदान को याद करती है. हम उनकी विरासत और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को झुकने नहीं देंगे.' सरकार की तरफ इस घोषणा को आंदोलनकारियों की एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जो 'ट्री एक्ट' जैसी सख्त मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे. इस घोषणा के बाद अब आंदोलनकारियों के बीच अनशन खत्म करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि लिखित आश्वासन मिलने तक महापड़ाव जारी रहने की संभावना है.
विधानसभा में भी दिया आश्वासन
खेजड़ी बचाओ आंदोलन की गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी. राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान खाजूवाला से विधायक डॉ.विश्वनाथ मेघवाल ने भी आंदोलन का जिक्र किया. डॉ.विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी अवगत कराया है. सरकार भी मानती है कि खेजड़ी और अन्य पेड़ों की कटाई रोकी जानी चाहिए. सरकार ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लाने पर भी विचार कर रही है जिसका अभी विधि विशेषज्ञों से अध्ययन कराया जा रहा है.
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क्यों आंदोलन पर उतरे लोग
इस पूरे विवाद की जड़ में पश्चिमी राजस्थान के सोलर पावर प्रोजेक्ट्स हैं. राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को 'मरुस्थल की जीवनरेखा' कहा जाता है, लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि बीकानेर संभाग में विकास के नाम पर हजारों खेजड़ी के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि कई जगहों पर इन पेड़ों को काटकर सबूत मिटाने के लिए जमीन में गाड़ देने की शिकायतें भी सामने आई हैं. इसी अवैध कटाई ने बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों को आक्रोशित कर दिया. संतों और र्यावरण प्रेमियों की मुख्य मांग है कि इस जुर्माने को खत्म कर इसे 'गैर-जमानती अपराध' की श्रेणी में डाला जाए. साथ ही, खेजड़ी संरक्षण को एक 'धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर' घोषित करते हुए एक विशेष और कड़ा कानून (Tree Act) बनाया जाए, ताकि सोलर प्लांट कंपनियां मनमानी नहीं कर सकें.


