कहां तक जाएगी सचिन पायलट की उड़ान… प्रदेशभर में पायलट के जन्मदिन की धूम

अपने जन्मदिन पर पायलट ने राजनीकि हल्कों में दिया अपने रणनीतिक तौर पर परिपक्व होने का संदेश, लोकसभा में सबसे युवा सांसद होने का रिकॉर्ड दर्ज है पायलट के नाम, नैतिक मूल्यों से जुड़ी राजनीति में रखते हैं विश्वास

Sachin Pilot Birthday Special
Sachin Pilot Birthday Special

PoliTalks.News/Rajasthan. सचिन पायलट (Sachin Pilot Birthday) के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं. जिदंगी के सफर में वो 43वें पड़ाव में प्रवेश कर रहे हैं. राजस्थान भर में उनके समर्थक और कांग्रेस कार्यकर्ता जन्मदिन को रक्दान करके समाजसेवा के संकल्प के साथ मना रहे हैं. सियासी मायने से भी पायलट का जन्मदिन बहुत महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है. पायलट ने राजनीकि हल्कों में उनके रणनीतिक तौर पर परिपक्व होने का संदेश भी लगे हाथों दे दिया. पायलट के जन्मदिन पर राजस्थान के कई क्षेत्रों में छपे अखबारों के विज्ञापनों में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, राजस्थान प्रभारी अजय माकन, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा के भी फोटो लगाए गए हैं. यह सचिन पायलट की राजनीति का बड़ा संकेत है.

पायलट समर्थकों की ओर से लगाए गए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डोटासरा के फोटो से कांग्रेस में पिछले दिनों से चल रही असमंजस की स्थिति को विराम दिया गया है. यह कांग्रेस की राजनीति के लिए अच्छा और विस्तृत संकेत है. प्रदेशभर में रक्तदान शिविर के अलावा कई और तरह के समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं. इनमें जरूरतमंदों को सहयोग कराना, गायों को चारा डालना, गरीबों को भेजना करना जैसे कार्यक्रम भी हो रहे हैं.

अब नजर डाल लेते हैं पायलट के अब तक के राजनीतिक करियर पर. कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय राजेश पायलट और रमा पायलट के सुपुत्र सचिन पायलट का जन्म 7 सितंबर, 1977 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक गुर्जर परिवार में हुआ. स्वर्गीय राजेश पायलट कांग्रेस में एक कददावर नेता के तौर पर पहचान रखते थे. लेकिन पायलट ने शुरू से ही अपने अनुभव और योग्यता के चलते राजनीति में बड़े मुकाम हासिल करने के लिए कदम बढ़ाए. उनसे जुड़े नेता इस बात को कहते हैं कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने अपने पिता के नाम को इस्तेमाल करने से हमेशा परहेज रखा. पायलट अपनी ही सूझबूझ से रास्ता बनाकर आगे बढ़ते रहे और अब भी बढ़ रहे हैं.

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सबसे पहले दौसा फिर अजमेर से सांसद रहे सचिन पायलट ने पहला चुनाव 2004 की लोकसभा के लिए दौसा से लड़ा. आम चुनाव जीतकर 26 साल की उम्र में लोकसभा पहुंचने वाले सबसे युवा सांसद बने. दौसा सीट एससी के लिए रिर्जव हो जाने के चलते पायलट ने 2009 का लोकसभा चुनाव अजमेर से लड़ा और रिकॉर्ड मतों से जीतकर सदन में पहुंचे. उसी दौरान केंद्र में बनी मनमोहनसिंह की सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में अपनी प्रतिभा साबित की.

इसके बाद हुए लोकसभा 2014 के चुनाव में पायलट को नरेंद्र मोदी लहर के चलते अजमेर संसदीय क्षेत्र से पहली बार हार का सामना करना पड़ा. हार के बाद पायलट के जीवन का नया राजनीतिक सफर शुरू हुआ. देश और राज्य में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बने माहौल में पायलट ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनौती भरा भार अपने कंधे पर लिया. निराशा से भरे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जान फूंकने के लिए वो राजस्थान के हर शहर, कस्बे, गांव और ढाणी तक गए. साल 2018 में विधानसभा चुनाव के परिणामों ने पायलट के जोश और कुशल नेतृत्व को साबित कर दिया. मोदी लहर होने के बावजूद राजस्थान में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने के लिए बहुमत के आंकड़े को छू लिया.

राज्य में सरकार बनाने की गहमा-गहमी और उलझनों के बीच आलाकमान के निर्णय के बाद पायलट उपमुख्यमंत्री बनें. राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते पायलट अब न उपमुख्यमंत्री हैं और ना ही प्रदेश अध्यक्ष. लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं में पायलट बडी शख्सियत के रूप में अपनी जगह बना चुके हैं. पायलट के जीवन का यह रौचक सफर तेजी से आगे बढ़ रहा है.

नई दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद पायलट ने स्नातक की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ली. उसके बाद एमबीए की डिग्री के लिए अमरीका स्थित पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के व्हॉर्टन स्कूल से पढाई की. पायलट की शिक्षा का प्रभाव उनके जीवन पर साफ नजर आता है. वो सधे और मंझे हुए वक्ता के तौर पर युवाओं के बीच किसी भी दूसरे नेता से ज्यादा लोकप्रिय बन गए.

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आज पायलट के जन्मदिन को मनाने के लिए युवाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है. 43वें जन्मदिन पर 43 हजार यूनिट रक्तदान के संकल्प से ही समझा जा सकता है कि युवाओं के दिल में पायलट कितनी अहमियत बना चुके हैं. अभी सफर बाकी है. पायलट के लिए यह समय राजनीति दृष्टि से टर्निंग प्वाइंट से कम नहीं. इसमें उनकी सूझबूझ से लिए गए निर्णय उनकी राजनीतिक दिशा तय करेंगे. जन्मदिन के मौके पर अखबारों में जारी विज्ञापनों में उनके समर्थकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डटोसरा की फोटो लगाकर युवा ऊर्जा के साथ अनुभव की झलक भी दे दी है.

राष्ट्रीय और प्रदेश कांग्रेस जिन स्थितियों, परिस्थितियों से गुजर रही है, उनमें पायलट की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है. आत्म-सम्मान के लिए नाराज होकर जाना और उसे हासिल करने का फार्मूला लेकर वापस आना भी इस बात का साफ संकेत है कि पायलट नैतिक मूल्यों से जुड़ी राजनीति में विश्वास जता रहे हैं. नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच मनाया जा रहा पायलट का 43वां जन्मदिन नई और अनुभव से भी राजनीति का संकेत कर रहा है. देखना यह होगा कि आने वाले समय में पायलट अपने आत्म सम्मान की लड़ाई को किस तरह से लड़ते हैं. इतना तो जरूर है कि पायलट नैतिक मूल्य आधारित राजनीति के घाट पर खड़े नजर आ रहे हैं.

 

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