



पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भर्तियों में कथित गड़बड़ी को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, उन्होंने 2015 से 2026 तक की सभी भर्तियों की निष्पक्ष जांच और 2024-25-26 की फाइलें खोलने की मांग की
Rajasthan Politics: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. गहलोत ने कहा कि युवाओं के साथ न्याय के लिए कांग्रेस शासन सहित पिछले 11 वर्षों से लेकर वर्ष 2026 तक की सभी भर्तियों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए.
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान को हास्यास्पद और जांच को भटकाने वाला बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) में पकड़े गए आरोपियों ने केवल कांग्रेस शासन के दौरान गड़बड़ी की. गहलोत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 2019 में ओएमआर शीट बदलने जैसा अपराध कर रहा था और 2026 तक उसी पद पर बना रहा, तो यह मानना असंभव है कि उसने भाजपा सरकार के कार्यकाल 2024-25 में कोई गड़बड़ी नहीं की होगी.
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जांच पूरी होने से पहले ही अपने कार्यकाल को “क्लीन चिट” देना क्या राज्य की जांच एजेंसी एसओजी (SOG) पर दबाव बनाने जैसा नहीं है, ताकि 2024-25-26 से जुड़ी फाइलों को खोला ही न जाए.
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गहलोत ने जोधपुर के शेरगढ़ उपखंड में रीट भर्ती परीक्षा 2025 के दर्जनों एडमिट कार्ड सड़क पर मिलने के मामले को भी गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में 100 किलोमीटर तक कोई परीक्षा केंद्र नहीं था, वहां एडमिट कार्ड मिलना गंभीर संदेह पैदा करता है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है.
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का उद्देश्य सिस्टम को सुधारने और युवाओं को न्याय देने के बजाय इस पूरे मुद्दे पर केवल राजनीति करना है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गड़बड़ी सामने आने पर पिछली सरकारों पर दोष मढ़ने के बजाय सख्त कार्रवाई की गई. RPSC सदस्य सहित 265 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया, कठोर कानून बनाए गए और भर्ती माफिया की संपत्तियां ध्वस्त की गईं.
अशोक गहलोत ने हमला जारी रखते हुए कहा कि भाजपा सरकार को डरने के बजाय अपने कार्यकाल की भी निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. गहलोत ने आरोप लगाया कि अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राज्य की जांच एजेंसियों पर दबाव डाला जा रहा है कि जांच को केवल 2023 तक सीमित रखा जाए और 2024-25-26 की भर्तियों की जांच न हो. उन्होंने कहा कि एसओजी स्वयं कह चुकी है कि पिछले 11 वर्षों से ओएमआर शीट में गड़बड़ी की जा रही थी, ऐसे में राज्य सरकार को एसओजी की बात को गंभीरता से लेना चाहिए.


