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गुरूवार को प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के साथ-साथ मंत्रियों की शपथ ग्रहण के बाद से ही हर कोई मंत्रालय आंवटन पर टकटकी लगाए बैठा था. शुक्रवार को तस्वीर साफ हुई और मोदी मंत्री मंडल के सदस्यों को अलग-अलग मंत्रालयों का जिम्मा सौंप दिया गया. बीजेपी को लगातार दूसरी बार 25 सीटें देने वाले राजस्थान को भी इस मंत्रीमंडल में तरजीह दी गई है. पिछली बार भी मोदी सरकार में राज्य से तीन मंत्री बनाए गए थे. इस बार भी प्रदेश से तीन ही मंत्री बनाए गए हैं. जिनमें गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और कैलाश चौधरी को आज विभाग सौंपे गए हैं.

पीएम नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उनके मंत्री मंडल में जगह पाने वाले तीनों मंत्रियों को शुक्रवार को विभाग दे दिए गए. जिसमें जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत को जल शक्ति मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया है. बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल को संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री के साथ भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री का जिम्मा दिया गया है. वहीं बाड़मेर से पहली बार संसद पहुंचने वाले कैलाश चौधरी को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री का पद दिया गया है.

गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को उनके ही गृहक्षेत्र यानी जोधपुर लोकसभा सीट पर करारी मात दी है. गजेंद्र शेखावत मूल रूप से शेखावाटी के सीकर जिले से हैं. स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करीब गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर सीट से लगातार दूसरी जीत हासिल की है. वे पूर्व में भी मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री के पद पर रह चुके हैं. शेखावत को मोदी और शाह की गुडबुक में शामिल होने के अलावा प्रदेश में संघ की पहली पसंद भी माना जाता है. इसके साथ-साथ वे बीजेपी संगठन में कई पदों पर काम कर चुके हैं.

वहीं बीकानेर से जीत की हैट्रिक लगाने वाले सांसद अर्जुनराम मेघवाल राज्य में पार्टी का बड़ा दलित चेहरा हैं. पिछली मोदी सरकार में मेघवाल कैबिनेट में जल संसाधन, नदी विकास और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री रह चुके हैं. रिटायर्ड आईएएस 66 वर्षीय अर्जुन मेघवाल मूलतया बीकानेर के किसमीदेसर गांव के निवासी हैं. लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले अर्जुन मेघवाल की लोकसभा में काफी अच्छी परफोर्मेंस रही है. इस बार वे अपने ही मौसरे भाई कांग्रेस प्रत्याशी सेवानिवृत आईपीएस मदन गोपाल मेघवाल को शिकस्त देकर संसद पहुंचे हैं.

तो वहीं बीजेपी द्वारा मौजुदा सांसद सोनाराम का टिकट काटकर बाड़मेर सीट पर पूर्व विधायक कैलाश चौधरी को मौका देने के फैसले ने हर किसी को हैरत में डाल दिया. कैलाश रातों रात सुर्खियों में आ गए. उन्होंने यहां बीजेपी से बगावत कर कांग्रेस में शामिल पूर्व दिग्गज नेता जसवंत सिंह जसोल के बेटे मानवेंद्र सिंह को करीब सवा तीन लाख वोटों से शिकस्त देक शानदार जीत दर्ज की. यह मुकालबा बेहद कड़ा माना जा रहा था और सबकी निगाहें बाड़मेर सीट पर थी. 46 वर्षीय कैलाश चौधरी ने एमए, बीपीएड तक शिक्षा प्राप्त की हैं.

बायतू तहसील निवासी कैलाश चौधरी ने साल 2013 में बायूत विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे. उन्होंने यहां दिग्गज कांग्रेसी कर्नल सोनाराम को पटकनी दी थी. हांलाकि इसके बाद सोनाराम ने कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी का दामन थाम लिया और पिछली लोकसभा चुनाव में इसी बाड़मेर संसदीय सीट से जीतकर सांसद बने थे. लेकिन इस बार पार्टी ने कर्नल सोनाराम को दरकिनार कर कैलाश चौधरी को मैदान में उतारा था.

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