…तो राजस्थान की इन चार सीटों पर होगा उपचुनाव

राजस्थान में लोकसभा चुनाव के दंगल में चार वर्तमान विधायक भी अपनी किस्मत आजमाने उतरे हैं. कांग्रेस ने दो और बीजेपी ने एक मौजूदा विधायक को लोकसभा चुनाव का टिकट थमाया था. वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी प्रमुख और विधायक हनुमान बेनीवाल एनडीए उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ा.

नियमों के अनुसार, अगर कोई विधायक सांसद चुना जाता है तो उसे एक पद से इस्तीफा देना पड़ता है. उसके बाद अगले छह माह के भीतर चुनाव कराना जरुरी होता है. ऐसे में यदि इनमें से कोई भी उम्मीदवार संसद तक पहुंच जाता है तो उस स्थिति में उपचुनाव होना पक्का है. अगर ये चारों जीतते हैं तो चूरु की सादुलपुर, झुंझुनूं की मंडावा, कोटा की पीपल्दा और नागौर की खींवसर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय है. आइए जानते हैं उन सीटों के बारे में जहां उपचुनाव की संभावना बन रही है…

सादुलपुर
चूरु की इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस की विधायक कृष्णा पूनिया ने जीत दर्ज की थी. कांग्रेस ने कृष्णा पूनिया को जयपुर ग्रामीण से प्रत्याशी बनाया है. जातिगत समीकरणों और यूथ में क्रेज़ के चलते पूनिया ने बीजेपी के राज्यवर्धन सिंह को कड़ी टक्कर दी है. कांग्रेस इस सीट पर जीत तय मानकर चल रही है. अगर कांग्रेस का यह अनुमान सच साबित होता है तो सादुलपुर में उपचुनाव होगा. उस स्थिति में कांग्रेस यहां से कृष्णा के पति विरेंद्र पूनिया को टिकट दे सकती है.

मंडावा
मंडावा से मौजूूदा बीजेपी विधायक नरेंद्र खींचड़ ने झुंझुनूं से लोकसभा चुनाव लड़ा है. शुरुआत से ही खींचड़ ने मोदी लहर और अपने दम पर चुनाव में बढ़त बनाए रखी है. उनके सामने कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव हारने वाले श्रवण कुमार को टिकट पकड़ा दिया. ऐसे में खींचड़ की जीत तय लग रही है. खींचड़ के जीतने पर मंडावा में उपचुनाव होगा.

खींवसर
नागौर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने खींवसर विधायक और आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल के साथ गठबंधन करते हुए उन्हें एनडीए प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा. अगर हनुमान बेनीवाल विजयी होते है तो फिर यहां भी उपचुनाव होंगे. अगर ऐसा होता है तो हनुमान खींवसर विधानसभा सीट से अपने भाई नारायण को चुनाव लड़ाना चाहेंगे. फिलहाल यहां कांटे की टक्कर है और कांग्रेस की ज्योति मिर्धा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है.

कोटा
कांग्रेस ने कोटा से मौजूदा पीपल्दा विधायक रामनारायण मीणा को लोकसभा चुनाव मेें उतारा है. हालांकि शुरुआत में रामनारायण मीणा ने बीजेपी उम्मीदवार ओम बिड़ला की खिलाफत का फायदा उठाते हुए मजबूती से चुनाव लड़ा लेकिन मतदान के दिन मीणा के समीकरण बिगड़ गए. खैर… अगर यहां उपचुनाव होते हैं तो फिर मीणा अपने बेटे को टिकट दिलाने का प्रयास करेंगे.

जाहिर सी बात है कि इन चारों विधायकों में से जो भी चुनाव जीतेगा, वह विधायक पद छोड़ेगा और उस सीट पर उपचुनाव होंगे. ऐसी सीटें कौन-कौन सी होंगी, इसके लिए 23 मई को आने वाले नतीजोंं का इंतजार करना होगा.

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