Rajasthan: मनरेगा का नाम बदलने और इसमें किए गए कई बदलावों के विरोध में कांग्रेस केन्द्र सरकार के खिलाफ 45 दिन तक आंदोलन करेगी. कांग्रेस ने आज से 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इसी कड़ी मे आंदोलन की रणनीति पर चर्चा करने के लिए गुरुवार को नारायण सिंह सर्किल स्थित तोतुका भवन में प्रदेश कार्यकारिणी, जिलाध्यक्षों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और विभाग-प्रकोष्ठों की बैठक बुलाई.
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इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि इनकी विचारधारा नाथूराम गोडसे की विचारधारा है और हमारी महात्मा गांधी की. यूपीए सरकार के समय 'राइट टू वर्क' यानी 'काम का अधिकार' दिया गया था, उसे इन्होंने खत्म कर दिया. हमने महात्मा गांधी का नाम दिया था. डोटासरा ने काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की बात को बेमानी बताया. डोटासरा ने कि जब काम का औसत ही 30-35 दिन है तो 125 दिन करने का क्या लाभ है. गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार 2 साल से बकाया राजस्थान नरेगा के 5000 करोड़ रुपए नहीं दे रही है.
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अभियान को लेकर डोटासरा ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने पैंतालीस दिन तक 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान चलाने का निर्देश दिया है. इसके तहत कांग्रेस गांव-गांव में, चौपालों में जाएगी. उस पर चर्चा होगी. इसके तहत 10 तारीख को सभी जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, 11 तारीख को उपवास और 12 तारीख से गांव-गांव, चौपालों में जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा. अभियान के अंतिम चरण में बड़ी सभाएं भी होंगी.
डोटासरा ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को खत्म करना सिर्फ़ एक योजना को खत्म करना नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर, किसान से उसका संवैधानिक हक़ छीनने की सुनियोजित साज़िश है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के द्वारा महात्मा गांधी के नाम पर शुरू की गई मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी योजना बनी। मनरेगा ने न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ सशक्त की, बल्कि करोड़ों परिवारों को रोजी-रोटी, रोज़गार, सम्मान और अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि G-RAM-G योजना में ना काम की कानूनी गारंटी है. ना काम का संवैधानिक अधिकार है और ना ग्राम पंचायत को काम देने का अधिकार है.
इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य गांवों से पलायन रोकना, मजदूरों को शोषण से बचाना और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना था, जो सफल रहा. टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार का वास्तविक मकसद इस योजना को खत्म करना है. जूली ने कहा कि नाम बदलना महज नाटक है. असल नीयत गरीब के पेट पर लात मारना है. अब दिल्ली से तय होगा कि राजस्थान को कितना फंड मिलेगा और मजदूर क्या काम करेंगे. जूली ने आरोप लगाया कि सरकार का एकमात्र एजेंडा गरीबों, किसानों और मजदूरों को लगातार निशाना बनाकर उन्हें परेशान करना है, जैसा कि तीन कृषि कानूनों और श्रम कानूनों के मामले में देखा गया.