



सरकार में मंत्री, मौजूदा विधायक एवं पूर्व विधायकों सहित बड़े पद पर कार्यरत व्यक्ति पर फोड़ा हार का ठीकरा, सोशल मीडिया पर वायरल होने से संगठन में अफरा तफरी, चुनाव प्रक्रिया पर भी उठाया सवाल
राजस्थान की अंता विधानसभा पर हुए उप चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मोरपाल सुमन ने अपनी हार का ठीकरा पार्टी के ही कुछ विधायकों और पदाधिकारियों पर फोड़ा. उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि पार्टी के तीन विधायक और स्थानीय संगठन पदाधिकारी सहित पार्टी की भीतरघात इस हार के लिए जिम्मेदार हैं. इस संबंध में मोरपाल ने अपनी रिपोर्ट की प्रतिलिपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नीतिन नबीन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, जिलाध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी भेजी है. रिपोर्ट में उन्होंने हार का सबसे बड़ा कारण देरी से टिकट की घोषणा को बताया. अब बीजेपी जिलाध्यक्ष नरेश सिंह सिकरवार को भेजा गया यह आंतरिक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया, जिससे बीजेपी में हडकंप मच गया है.
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दो पेज के इस पत्र में मोरपाल सुमन ने पार्टी की भीतरघात को सर्वोपरी मानते हुए स्पष्ट लिखा है कि अंता उपचुनाव में पार्टी की हार केवल विरोधी दल की रणनीति का नतीजा नहीं थी, बल्कि पार्टी के भीतर ही किए गए भितराघात ने सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला की टीम पर भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से विरोध में काम करने और बारां के बड़े नेताओं को बड़ी राशि उपलब्ध करा स्थानीय मतदाताओं को प्रलोभन देकर विपक्षी प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाने का का गंभीर आरोप भी जड़ा. जिलाध्यक्ष को भेजा गया यह पत्र अब संगठन के भीतर तीखी बहस और असहज सवालों का कारण बन गया है. चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुमन ने कहा कि इलेक्शन कमीशन के ऑब्जर्वर ने निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई.
टिकट में देरी को बताया हार की असल वजह
मोरपाल ने दावा किया कि टिकट की घोषणा में अनावश्यक देरी हुई, जिससे संगठन और कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी. इसके अलावा, पूर्व जिलाध्यक्ष, संगठन प्रभारी, प्रधान प्रखर, चैयरमेन व उप प्रधान बारां, पूर्व विधायक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष हेमराज मीणा व उनकी टीम पर कांग्रेस के लिए काम करने और विपक्षी प्रत्याशी को जिताने में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया. इस पत्र में उन्होंने लिखा कि जिले के तीन बीजेपी विधायक प्रतापसिंह सिंघवी, ललित माीणा एवं राधेश्याम बैरवा ने भी पार्टी को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हराने में सहयोगी किया.
राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के व्यवसायी साझेदार पर भी आरोप लगाते हुए लिखा कि उन्होंने बाकायदा विरोधी प्रत्याशी के समर्थन में पैसे बांटने का काम किया, जिसकी जानकारी जिलाध्यक्ष को पहले भी दी गई थी लेकिन वहां से कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया गया.
बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप
पत्र में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के करीबी मनोज शर्मा, पूर्व विधायक हेमराज मीणा, पूर्व जिलाध्यक्ष नंदलाल सुमन, आनंद गर्ग, अंता प्रधान प्रखर कौशल, उपप्रधान धर्मेन्द्र यादव, नगर पालिका चेयरमैन रामेश्वर खंडेलवाल, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष मुकेश धाकड़ और एसटी मोर्चा जिलाध्यक्ष धर्मवीर मीणा जैसे नामों का उल्लेख किया गया है. सुमन का दावा है कि इन सभी की भूमिका ने चुनावी समीकरण पूरी तरह बिगाड़ दिए.
गौरतलब है कि बारां जिले की अंता विधानसभा पर हुए उप चुनाव में कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने बीजेपी के मोरपाल सुमन को 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया. अब मोरपाल ने हार का ठीकरा संगठन से जुड़े सभी छोटे से लेकर बड़े नेताओं, विधायकों एवं अन्य पदाधिकारियों पर फोड़ दिया. ऐसे में सवाल यह है कि क्या बीजेपी संगठन इस विस्फोटक आरोप पत्र को गंभीरता से लेकर आत्ममंथन करेगा या यह मामला भी आंतरिक राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा. फिलहाल, वायरल पत्र ने अंता उपचुनाव की हार को लेकर भाजपा की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है.


