प्रहलाद सिंह साहनी की जीवनी | Parlad Singh Sawhney Biography in Hindi
24 Jan 2026
प्रहलाद सिंह साहनी की जीवनी (Parlad Singh Sawhney Biography in Hindi)
Parlad Singh Sawhney Latest News - प्रहलाद सिंह साहनी दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में एक ऐसा नाम है, जिन्होंने इस सीट से पांच बार जीत दर्ज करके विधायक बनने का रिकॉर्ड दर्ज किया है, क्योकि अब तक का कोई और नेता इस सीट से इतनी बार जीत हासिल नहीं कर पाया है. साहनी को इस क्षेत्र का चतुर खिलाडी माना जाता है. अब यही कारण रहा कि कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने चांदनी चौक विधानसभा सीट को पार्टी के लिए अभेद्य किला बना दिया था और उनके पार्टी छोड़ने ही कांग्रेस यहाँ से अब तक जीत दर्ज करने में नाकाम रही है. 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी यहाँ से कांग्रेस की पराजय हुई थी. हालांकि साहनी पर लगातार यह इल्जाम लगते रहे है, कि एक विधायक रहते उनके काम ज्यादातर मुस्लिम क्षेत्रो में केंद्रित रहा है. इस लेख में हम आपको प्रहलाद सिंह साहनी की जीवनी (Parlad Singh Sawhney Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.
प्रहलाद सिंह साहनी का जन्म और परिवार (Parlad Singh Sawhney Birth & Family)
प्रहलाद सिंह साहनी का जन्म 15 मार्च 1950 को दिल्ली में हुआ था. उनके पिता का नाम स्वर्गीय हरा सिंह साहनी है. उनका विवाह 1981 में रणजीत कौर के साथ हुआ था, उनकी पत्नी गृहणी है.
प्रहलाद सिंह साहनी के दो बच्चे है, एक बेटा और एक बेटी. बेटे का नाम पुनरदीप सिंह साहनी जबकि, उनकी बेटी का नाम गुरसाहिबा कौर है. उनके बेटे भी राजनीति में सक्रिय है और वर्तमान में, आम आदमी पार्टी के टिकट पर विधायक दिल्ली के चांदनी चौक से है. प्रहलाद सिंह साहनी पंजाबी है. उनपर कोई आपराधिक मामला नहीं हैं.
प्रहलाद सिंह साहनी की शिक्षा (Parlad Singh Sawhney Education)
प्रहलाद सिंह साहनी ने ग्वालियर विश्वविद्यालय इंटरमीडिएट (12वीं) उत्तीर्ण किया. बाद में, उन्होंने इसी विश्वविद्यालय के एक कॉलेज से बीए की पढ़ाई की, लेकिन वर्ष 1971 में तीसरे वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी.
प्रहलाद सिंह साहनी का राजनीतिक करियर (Parlad Singh Sawhney Political Career)
प्रहलाद सिंह साहनी दिल्ली के चांदनी विधानसभा क्षेत्र का एक विख्यात नेता है. एक नेता के तौर पर उनका इस क्षेत्र में नाम है. उनकी राजनीतिक यात्रा की अगर बात करें, तो राजनीति में उनका आना पांच दशक से भी पहले हुआ था.
उन्होंने वर्ष 1977 में मोरी गेट वार्ड से अपना पहला नगर निगम चुनाव लड़ा और 100 वोटों से हार गए. मोरी गेट भी इसी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है. लेकिन साहनी ने एक नेता के आलवे एक समाजसेवी के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई थी, अब यही कारण रहा, कि उन्हें जमीन से जुड़ा नेता कहा जाता था. और जमीन से जुड़ने के कारण उन्हें क्षेत्र की राजनीति को बारीकी से समझने का मौका भी मिला, जिसका लाभ उन्हें आने वाले समय में मिला.
साहनी ने वर्ष 1983 में एक बार फिर उसी वार्ड से नगरपालिका चुनाव जीता और 1983 से 1990 तक सिविल लाइंस जोन के अध्यक्ष बने. एक नेता के तौर पर उनकी यह पहली विजय थी. इसके बाद, उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 1998 से लेकर 2015 तक चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र से बार चुनाव लड़ा और चारो बार विजय रहे. उन्होंने 1998 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी वीरेश प्रताप चौधरी को 8,162 वोटों से हराकर दिल्ली की दूसरी विधानसभा में प्रवेश किया. फिर अगले चुनाव में यानि 2003 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के नेता धर्मवीर शर्मा को 10,866 वोटों के अंतर से हराया. 2008 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रवीण खंडेलवा को 8,019 वोटों के अंतर से हराया. इसी प्रकार 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के ही सुमन कुमार गुप्ता को 8,243 वोटों के अंतर से हराया. लेकिन इसके बाद दिल्ली की क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया क्योकि यह, वह दौर था जब दिल्ली में अन्ना हजारे का आंदोलन अपने चरम पर था और इसी का लाभ लेकर अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन कर लिया. आम आदमी पार्टी के गठन के बाद तो दिल्ली की राजनीतिक समीकरण ही बदल गई, जहां पहले यहाँ केवल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुकाबला हुआ करता था, वही अब यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया. इस त्रिकोणीय मुकाबला में सबसे ज्यादा हानि कांग्रेस को हुई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ का भी यहाँ से जीतना कठिन हो गया.
इसी कारण प्रहलाद सिंह साहनी को भी 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर अपनी परंपरागत सीट गवांनी पड़ी. साहनी को 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की अलका लांबा से हार का सामना करना पड़ा. नेताओ के लिए जीत ही सब कुछ होती है और इसके लिए उनके लिए पार्टी कोई मायने नहीं रखती. इसी कड़ी में साहनी ने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया और 6 अक्टूबर 2019 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उपस्थिति में आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए. साहनी आम आदमी पार्टी के टिकट पर 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत गए. 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में साहनी के कहने पर आम आदमी पार्टी ने उन्हें टिकट न देकर उनके बेटे पुनरदीप साहनी को चांदनी चौक से अपना उम्मीदवार बनाया दिया, जिन्हे यहाँ से जीत हुई.
चांदनी चौक विधानसभा सीट की राजनीतिक स्थिति
अब अगर चांदनी चौक विधानसभा सीट की राजनीतिक स्थिति पर ध्यान दें तो 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में यह सीट 'चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र' का एक हिस्सा है. यह सीट दिल्ली की ‘उत्तरी दिल्ली’ में आती है. इस सीट के गठन के बाद से यहाँ कांग्रेस का वर्चस्व कायम हो गया और बाद में, आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का स्थान ले लिया. इस सीट को कांग्रेस के लिए अभेद्य किला बनाने का श्रेय प्रहलाद सिंह साहनी को ही जाता है, क्योकि प्रहलाद सिंह साहनी ही वह नेता है, जिन्होंने कांग्रेस की ओर से लड़कर लगातार यहां से पार्टी को जीत का स्वाद चखवाते रहे थे और ऐसा लगता है जैसे उनके पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस यहाँ से अनाथ सी हो गई हो. अगर भाजपा की बात करें तो, इस सीट से भाजपा ने केवल एक बार जीत दर्ज की है. 1993 में भाजपा के वासुदेव कप्तान ने जीत दर्ज की थी, तब से अब तक यहाँ से भाजपा की जीत नहीं हुई है.
प्रहलाद सिंह साहनी की संपत्ति (Parlad Singh Sawhney Property)
2020 के विधानसभा चुनाव में दाखिल किये गए घोषणापत्र के अनुसार प्रहलाद सिंह साहनी की कुल संपत्ति 41.85 करोड़ रूपये हैं जबकि उनपर 5 करोड़ रूपये का कर्ज है.
इस लेख में हमने आपको प्रहलाद सिंह साहनी की जीवनी (Parlad Singh Sawhney Biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है. अगर आपका कोई सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं.