हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप झेल रहे गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ संजीवनी क्रेडिट सोसायटी केस में जांच के आदेश

संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले की शिकायत में गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ ही उनकी पत्नी और अन्य के नाम भी शामिल हैं. इस घोटाले में हजारों निवेशकों ने कथित तौर पर करीब 900 करोड़ रुपये गंवाए

गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ जांच के आदेश
गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ जांच के आदेश

Politalks.News/Rajasthan. लगता है जोधपुर सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की कुंडली में कोई भारी ग्रह प्रवेश कर गया है, जिसके कारण उनकी मुसीबतें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं. हाल ही में कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त से सम्बंधित एक ऑडियो क्लिप विवाद में आरोप लगने के बाद अब गजेन्द्र सिंह शेखावत एक और बड़ी मुसीबत में फंसते नजर आ रहे हैं. जयपुर की एडीजे कोर्ट ने एक और मामले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के खिलाफ जांच के आदेश दिये हैं. कोर्ट ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाला मामले में बाड़मेर निवासी गुमान सिंह और लाबू सिंह की रिवीजन को स्वीकार करते हुए जांच के आदेश दिए हैं.

मामले में संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले की शिकायत में गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ ही उनकी पत्नी और अन्य के नाम भी शामिल हैं. इस घोटाले में हजारों निवेशकों ने कथित तौर पर करीब 900 करोड़ रुपये गंवाए. जयपुर में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पवन कुमार ने मंगलवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को बीजेपी नेता के खिलाफ शिकायत को एसओजी के पास भेजने के निर्देश दिए. एसओजी की जयपुर ईकाई पिछले साल से इस घोटाले की जांच कर रही है. इस संबंध में प्राथमिकी 23 अगस्त 2019 को दर्ज की गई थी.

बता दें, संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की मुख्य शाखा जोधपुर से संचालित होती थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर रिविजन के मुताबिक उन्होंने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी में लाखों रुपये जमा कराए थे. सोसायटी ने यह पैसा गजेंद्र सिंह शेखावत और इनके सहयोगियों की कंपनियों में लगाया था. इस बीच, सोसायटी करोड़ों रुपयों के घोटाले में फंस गई. इस घोटाले की एसओजी ने जांच की थी. जांच कर रही एसओजी ने मामले में इनके खिलाफ जांच लंबित रखकर कोर्ट में चालान पेश कर दिया था. एसओजी ने मामले के संबंध में दाखिल आरोपपत्र में शेखावत का जिक्र नहीं किया. लेकिन बाद में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोपपत्र में उनका नाम शामिल करने की एक अर्जी भी खारिज कर दी थी.

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इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत का रुख किया. गुमान सिंह और लाबू सिंह ने कोर्ट में रिवीजन प्रार्थना-पत्र लगाया. मजिस्ट्रेट अदालत में दी अर्जी में दोनों शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि प्राथमिकी में धन के जिस लेनदेन का जिक्र है वह मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की कंपनियों से जुड़ा है. इस प्रार्थना-पत्र पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने केन्द्रीय मंत्री शेखावत के खिलाफ जांच के आदेश जारी किये हैं.

ऐसे समय में यह घटनाक्रम सामने आया है जब केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत पर राजस्थान में चल रहे सियासी संग्राम के बीच अशोक गहलोत खेमे की ओर से जारी किये गये ऑडियो क्लिप में विधायकों की खरीद-फरोख्त करने के आरोप लगे थे. इस मामले में सरकार के मुख्य सचेतक डॉ. महेश जोशी ने एसओजी में मामला दर्ज कराया था. ऑडियो में हो रही बातचीत में तीन लोग शामिल हैं. इनमें से एक आवाज कथित तौर पर मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की बताई गई है. इस मामले को लेकर एसओजी जांच कर रही है और उसने गजेन्द्र सिंह को भी पूछताछ का नोटिस भेजा है.

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हालांकि केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ऑडियो क्लिप में शामिल होने के आरोपों को सिरे खारिज कर चुके हैं. ऑडियो क्लिप जारी होने के बाद उठे विवाद पर मंत्री शेखावत ने साफ शब्दों में कहा कि यह आवाज उनकी नहीं है. वे किसी भी तरह की जांच के लिये तैयार है. यह उन्हें बदनाम की कोशिश की गई है.

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