



इतनी बड़ी संख्या में लोगों की नागरिकता जाने के मुद्दे पर कुमार संजय कृष्ण ने कहा कि 200 ऐसे न्यायाधिकरण स्थापित करने की प्रक्रिया पहले से ही है. इसके अलावा सूची से बाहर रखे गए लोगों के लिए 200 अन्य न्यायाधिकरणों की स्थापना की जाएगी. फॉरनर्स ट्रिब्यूनल अर्ध न्यायिक अदालतें हैं, जो उन लोगों की सुनवाई करेंगी, जिन्हें लिस्ट से बाहर रखा गया है. गौरतलब है कि असम एनआरसी (Assam NRC) की पहली लिस्ट 1951 में जारी की गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में एनआरसी को अपडेट करने का आदेश दिया था ताकि बोनाफाइड नागरिकों की पहचान हो सके और अवैध अप्रवासियों को बाहर निकाला जा सके. लेकिन असली काम फरवरी 2015 में शुरू हुआ. पिछले साल 30 जुलाई, 2018 को जब ड्राफ्ट पब्लिश हुआ तो 40.7 लाख लोगों को नागरिकता सूची से बाहर रखा गया था. अब शनिवार को फाइनल लिस्ट सावर्जनिक किए जाने तक 19 लाख से अधिक असम प्रवासियों के नाम लिस्ट में नहीं से सभी पर गैर प्रवासी होने का खतरा मंडराने लगा है.My appeal to the people of Assam on the eve of publication of final #NRC pic.twitter.com/rZJJSB3cuj
— Sarbananda Sonowal (@sarbanandsonwal) August 30, 2019


