महाराष्ट्र में लंबे समय से लंबित नगर निगम चुनावों के दौरान नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि तक कई विपक्षी उम्मीदवारों ने अपने पर्चे वापस ले लिए. इसके चलते बीजेपी–शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन ने 66 वार्ड और अजीत पवार की एनसीपी ने 2 वार्ड बिना मतदान के ही जीत लिए. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, यदि किसी वार्ड में नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक केवल एक उम्मीदवार बचता है, तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है. इस बार नामांकन वापसी के बाद बीजेपी–शिवसेना गठबंधन ने 66 सीटें और एनसीपी (अजीत पवार गुट) ने 2 सीटें इसी प्रक्रिया के तहत जीत लीं. यह जीत भले ही कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्विरोध निर्वाचन कहलाए, लेकिन इसके राजनीतिक और लोकतांत्रिक निहितार्थ कहीं गहरे हैं.
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सत्ता का दबदबा या विपक्ष की कमजोरी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति केवल सत्ताधारी दलों की मजबूती नहीं, बल्कि विपक्ष की रणनीतिक विफलता को भी उजागर करती है. कई स्थानों पर विपक्षी दल मजबूत उम्मीदवार खड़े नहीं कर पाए, वहीं कुछ जगहों पर अंतिम समय में नामांकन वापस लेने के फैसले ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए.
विपक्ष के आरोप और लोकतंत्र का सवाल
हालांकि विपक्ष ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. विपक्षी दलों का आरोप है कि पुलिस और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के कारण कई उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. कल्याण-डोम्बिवली जैसे क्षेत्रों में धमकी और दबाव के आरोप भी लगाए गए हैं.
इन क्षेत्रों में महायुति ने हासिल की विजयश्री
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के कल्याण-डोम्बिवली निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के 15 उम्मीदवार निर्वाचित हुए, जबकि शिवसेना शिंदे समूह के छह सदस्यों सहित कुल 21 लोग निर्विरोध चुने गए. पुणे में दो और पिंपरी-चिंचवड में दो सहित बीजेपी के चार लोग निर्विरोध चुने गए हैं. उत्तरी महाराष्ट्र की चार नगरपालिकाओं में 17 लोग निर्विरोध निर्वाचित हुए. इनमें से 10 बीजेपी से, छह शिवसेना शिंदे समूह से और मालेगांव में स्थानीय 'इस्लामिक पार्टी' से एक व्यक्ति निर्विरोध निर्वाचित हुआ.
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इसी तरह, अहिल्यानगर नगर निगम में बीजेपी के तीन सदस्य और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के दो सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए. कल्याण-डोंबिवली में बीजेपी ने सबसे अधिक 15 सीटें जीतीं. पनवेल में 6 सीटें, भिवंडी-निजामपुर में 6 सीटें और जलगांव में भी बीजेपी को 6 सीटों पर जीत मिली. पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में पार्टी ने 2-2 सीटें अपने नाम कीं, जबकि धुले में 4 सीटें और अहिल्यानगर में 3 सीटें जीतकर बीजेपी ने अपनी स्थिति मजबूत की. ठाणे में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 7 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं कल्याण-डोंबिवली और जलगांव में शिंदे गुट ने छह-छह सीटें जीतकर अपने जनाधार को और मजबूत किया.