‘काश निर्मला सीतारमण ने इकनोमिक सर्वे पढ़ा होता..’ बजट 2026-27 में आएंगी ये 10 चुनौतियां

1 Feb 2026

 एनडीए द्वारा पेश किए आम बजट पर विपक्ष ने लगाया सवालिया निशान, मोदी सरकार पर कसा तंज, पूर्व वित्तमंत्री ने भी की आलोचना, आगामी चुनौतियों को बताया अहम

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को रिकॉर्ड 9वीं बाद लोकसभा में आम बजट 2026-27 पेश किया. यूनियन बजट को लेकर सभी की मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इसे युवा बजट कहकर संबोधित किया, वहीं विपक्ष ने इसे केवल कुछ व्यवसा​यियों को लाभ पहुंचाने वाला महज एक दस्तावेज करार दिया. कांग्रेस सरकार में वित्तमंत्री रहे पी.चिदंबरम ने भी बजट 2026 की आलोचना की. उन्होंने कहा कि ये बजट GDP ग्रोथ, निवेश और रोजगार के लिए कुछ भी खास नहीं करता है.

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इधर, कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 2026-27 में 10 चुनौतियों का जिक्र किया. AICC मीडिया के रिसर्च एवं मॉनिटरिंग के इंचार्ज अमिताभ दूबे ने एक प्रेस वार्ता में इन सभी चुनौतियों को मीडिया के समक्ष साझा किया. उन्होंने कहा कि आज देश के सामने ये बड़ी चुनौतियां हैं और इस बजट में इनके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

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इस प्रकार से हैं 10 प्रमुख चुनौतियां

1. अमेरिका के 50% टैरिफ का असर

2. दुनिया में जारी ट्रेड वॉर का भारी असर

3. चीन के साथ लगातार बढ़ता ट्रेड डेफिसिट

4. इन्वेस्टमेंट रेट का 30% पर वर्षों से अटका होना 

5. रुपये का लगातार गिरना, FPI का लगातार बाहर जाना

6. राजकोषीय समेकन की बेहद धीमी गति, FRBM के विपरीत लगातार ऊंचा राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा

7. आधिकारिक रूप से घोषित मुद्रास्फीति के आंकड़ों और घरेलू खर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन के वास्तविक बिलों के बीच लगातार बना रहने वाला अंतर

8. लाखों MSMEs का बंद होना, बचे MSMEs संघर्ष कर रहे हैं

9. बढ़ती बेरोजगारी

10. शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचों की खराब हालत

कांग्रेस ने ये भी कहा कि इस बजट से सरकार की प्राथमिकताएं भी साफ हो जाती हैं. बजट से साफ है कि इसमें गरीब और मिडिल क्लास के लिए कुछ भी नहीं है.

मोदी सरकार द्वारा अलग-अलग मंत्रालयों में की गई कटौती साफ दिखती है.

ग्रामीण विकास: ₹53,067 करोड़
शहरी विकास: ₹39,573 करोड़
सामाजिक कल्याण: ₹9,999 करोड़
कृषि: ₹6,985 करोड़
शिक्षा: ₹6,701 करोड़
स्वास्थ्य: ₹3,686 करोड़

इतना ही नहीं- बहुप्रचारित 'जल जीवन मिशन' का भी बजट 67,000 करोड़ रुपये से घटाकर सीधे 17,000 करोड़ रुपये कर दिया गया.

ये बजट हमारी अर्थव्यवस्था के सामने आ रही चुनौतियों से निपटने में कुछ भी नहीं करता है, इसलिए यह पूरी तरह से फेल बजट है.

कांग्रेस ने बजट पर तंज कसते हुए यह भी कहा, 'काश निर्मला सीतारमण जी ने अपना इकनोमिक सर्वे पढ़ा होता तो शायद उन्हें समझ आ जाता कि देश और अर्थव्यवस्था के सामने क्या चुनौतियां हैं.'