नेताजी की दरियादिली, बुजुर्ग के हाथ पर लिखकर दी काम होने की गारंटी !

10 Feb 2026

MLA गोपीचंद मीणा ने बुजुर्ग के हाथ पर लिखा'एक साल में पुल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा', कहा- ना गिन कर दिया ना तौल कर, सबको दिया दिल खोलकर

भीलवाड़ा के जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र के कांटी में विधायक गोपीचंद मीणा के दौरे के दौरान एक रोचक वाकया सामने आया है. विधायक गोपीचंद मीणा यहां कई विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास करने पहुंचे थे. इसी दौरान MLA के पास मंच पर पहुंचे बुजुर्ग रामेश्वरलाल सेन ने कांटी-घेवरिया खाल पर लंबे समय से लंबित पुलिया निर्माण की मांग उठाई. बुजुर्ग ने कहा कि साहब, आश्वासन तो सब देते हैं, पर काम कोई नहीं करता. इस पर विधायक गोपीचंद मीणा ने बुजुर्ग के हाथ पर ही लिखकर एक साल में काम होने की गारंटी दे दी. गोपीचंद मीणा ने बुजुर्ग के हाथ पर लिखकर काम हो जाने का भरोसा दिलाया. विधायक ने पेन से रामेश्वरलाल सेने के हाथ पर लिखा कि 'एक साल में पुल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा'. अब बुजुर्ग और विधायक के बीच हुई बातचीत और हाथ पर पेन से लिखने का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है.

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विकास कार्यों का किया लोकार्पण-शिलान्यास
विधायक गोपीचंद मीणा ने कांटी क्षेत्र में सामुदायिक चौक की चारदीवारी, गढ़ के बालाजी मंदिर में लालबाई-फूलबाई टीन शेड, मीणा का खेड़ा विद्यालय में चारदीवारी और खेल मैदान में मिट्टी भराई, गणेश घाट, शिव मंदिर विश्रांति गृह, जुनी कांटी चारभुजा नाथ मंदिर टीन शेड, मोडिया खेड़ा रोड पर सार्वजनिक वाचनालय, कांटी श्मशान घाट, बैरवा मोहल्ला वाचनालय विश्रांति गृह समेत कई विकास कार्यों का लोकार्पण किया. इसके साथ ही करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले विद्यालय भवन का शिलान्यास भी किया.

ना गिन कर दिया ना तौल कर, सबको दिया दिल खोलकर
इससे पहले ग्रामीणों ने विधायक गोपीचंद मीणा का जोरदार स्वागत किया. विधायक को ऊंट पर बैठाकर सभा स्थल तक लाये और जेसीबी से फूल बरसाकर अभिनंदन किया. इस मौके पर विधायक गोपीचंद मीणा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी जमकर निशाना साधा. विधायक गोपीचंद मीणा ने कहा कि पांच साल तक कांग्रेस सरकार सिर्फ सेटिंग करने में लगी रही. आमजन के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ. कांटी-घेवरिया की पुलिया आज भी अधूरी है. किसानों को बिजली नहीं मिली और शिकायत करने पर कहा जाता था कि लोड सेटिंग चल रही है. स्थानीय कांग्रेसी नेता अपने और हिस्ट्रीशीटरों के मुकदमे निपटाने में लगे रहे, जबकि सरकार खुद को बचाने की सेटिंग में व्यस्त रही. गोपीचंद मीणा ने कहा कि हमने महज दो साल में 15 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए हैं. न गिनकर दिया, न तौलकर- जिसने जो मांगा, उससे ज्यादा दिल खोलकर दिया है.