उद्योगों में 80% रोजगार स्थानीय युवाओं को मिले- संसद में फिर गरजे हनुमान बेनीवाल

12 Feb 2026

सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में मांग की है कि 80% रोजगार स्थानीय युवाओं को मिले, इसके साथ ही संविधान और श्रमिक अधिकारों की अवमानना पर जताई गहरी चिंता

MP Hanuman Beniwal Big Statement: लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने मजदूरों, संविदा कर्मियों, गिग वर्कर्स और बेरोजगार युवाओं के हितों को जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि तकनीकी संशोधन के नाम पर लाया गया यह विधेयक श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने की दिशा में कदम है. सरकार इसे “स्पष्टता” का प्रयास बता रही है, लेकिन हकीकत यह है कि इससे उद्योगपतियों को सुविधा और मजदूरों को असुरक्षा मिलेगी. बेनीवाल ने सवाल उठाया कि यदि विधेयक वास्तव में श्रमिक हित में है तो देशभर की ट्रेड यूनियनें इसका विरोध क्यों कर रही हैं.

सांसद ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(c) और 21 का हवाला देते हुए सांसद बेनीवाल ने कहा कि श्रमिकों की परिभाषा सीमित करना और हड़ताल व सामूहिक सौदेबाजी पर कठोर शर्तें लगाना समानता और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि हड़ताल “मजदूर का हथियार” है और इसे निष्प्रभावी बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. साथ ही अनुच्छेद 38, 39 और 43A का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक-आर्थिक न्याय और उद्योगों में श्रमिक भागीदारी केवल किताबों की बातें नहीं, बल्कि शासन की दिशा तय करने वाले सिद्धांत हैं.

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राजस्थान का उदाहरण देते हुए सांसद बेनीवाल ने कहा कि सीमेंट फैक्ट्रियों और रिफाइनरी जैसे उद्योगों में श्रमिक हितों की अनदेखी के कई मामले सामने आए हैं. कई बार दुर्घटनाओं में मजदूरों की मौत के बाद भी परिजनों को उचित सहायता नहीं मिलती और आंदोलन के दबाव में ही उद्योग प्रबंधन झुकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि श्रम विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा.

सांसद हनुमान बेनीवाल ने स्पष्ट कहा कि वे उद्योग, निवेश या सुधार के विरोधी नहीं हैं, लेकिन श्रमिक विरोधी कानून स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने मांग की कि विधेयक को व्यापक परामर्श के बाद ही लागू किया जाए, औद्योगिक न्यायाधिकरणों की समयबद्ध स्थापना हो और हड़ताल व सामूहिक सौदेबाजी से जुड़े प्रावधानों में संतुलन लाया जाए. साथ ही उन्होंने उद्योगों में 80 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को देने की नीति बनाने, नागौर में तीन डॉक्टरों की लंबित ईएसआईसी डिस्पेंसरी को स्वीकृति देने और संविदा कर्मियों को नियमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग भी सदन में रखी.