अजीत ‘दादा’ के दुखद निधन के बाद बदल जाएगी महाराष्ट्र की अंदरूनी राजनीति !

ajit pawar death
28 Jan 2026

अजित पवार की जीवनी, निधन | Ajit Pawar Biography, Passed Away in Hindi

अजित पवार के बाद एनसीपी में संगठनात्मक पुनर्गठन की आहट, पुराने स्वरूप में लौटने की तैयारी तेज, विमान हादसे में हुआ एनसीपी प्रमुख का निधन

Ajit Pawar Plane Crash : महाराष्ट्र के पांच बार के डिप्टी सीएम अजित पवार का बुधवार को एक विमान हादसे में निधन हो गया. घटना बारामती एयरपोर्ट के पास लैंडिंग के प्रयास के दौरान हुई विमान दुर्घटना में हुई, जिसमें उनके साथ सवार अन्य तीन लोगों की भी मौत हुई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया का अचानक दुनिया से चले जाना पवार परिवार के लिए एक बेहद दुखद घटना है. पवार महाराष्ट्र की राजनीति के प्रतिष्ठित चेहरे रहे हैं, जिन्होंने दशकों से राज्य में सक्रिय भूमिका निभाई है और राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका नाम प्रमुख रूप से लिया जाता रहा है. उनके निधन के बाद राजनीतिक हलकों में अचानक बदलाव की संभावनाओं ने घर करना शुरू कर दिया है.
'दादा' के नाम से मशहूर अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण और निर्णायक प्रभाव रखने वाले नेता रहे हैं. उन्होंने 2023 में एनसीपी भीतर पार्टी विभाजन के बाद सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उपमुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी. उनके निधन से अब महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा फेरबदल आने की संभावना है.

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मसलन: विघटन से पहले तक एनसीपी का सारा दायित्व केवल और केवल शरद पवार के हाथों में था. पार्टी टूटने के बाद अजित पवार एनसीपी के अध्यक्ष बन गए और शरद पवार ने नई पार्टी एनसीपी-एसपी बना ली. पार्टी के विघटन का कारण रहा: शरद पवार द्वारा अपनी पुत्री सुप्रिया सूले को पार्टी का भविष्य का मुखिया बनाना, जो अजित पवार को पसंद नहीं आया. पार्टी टूटने के बाद पवार ने फिर से पार्टी का नेतृत्व अपने हाथों में लिया. चूंकि एनसीपी में अजित पवार के कद का कोई अन्य नेता फिलहाल नहीं है जो पार्टी के सभी विधायकों, नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को एक झंडे के लिए कायम रख सके, ऐसे में माना यही जा रहा है 'दादा' के नाम से मशहूर अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की अंदरुनी राजनीति बदलने वाली है.

विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक नेतृत्व और गठबंधन समीकरण पर नया पुनर्गठन हो सकता है. विशेषकर- स्थानीय निकाय चुनावों और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर. भाजपा-NCP गठबंधन पर असर के साथ ही विपक्षी महाविकास आघाड़ी के लिए भी नई चुनौतियां व अवसर उभर सकते हैं.
फिलहाल एनसीपी महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सहभागी है. अब अजीत पवार की जगह पार्टी के किसी अन्य नेता का डिप्टी सीएम बनना तय है. हालांकि वो पार्टी के विधायकों को कितना बांधे रख पाएगा, ये भविष्य की बात है. महाराष्ट्र की राजनीति में एक रणनीतिक नेता माने जाने वाले अजित पवार की अनुपस्थिति में एनसीपी का लंबे समय तक सत्ता या अस्तित्व में टिके रहना दूर की कोड़ी माना जा रहा है.

राजनीति का एक धड़ा ये मान रहा है कि अब एनसीपी की बागड़ौर एक बार फिर शरद पवार के हाथों में आने वाली है. वही एक हैं जो इस संकट की घड़ी में पार्टी के सारथी बन सकते हैं. हाल में निकाय चुनाव भी एनसीपी ने शरद पवार की पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था. हालांकि सफलता उतनी नहीं मिल पायी लेकिन पार्टी के एकजुट होने की नींव शायद रखी दी गयी थी.

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वहीं दूसरे धड़े का ये भी मानना है कि पार्टी अपना नया नेता चुनकर अस्तित्व में रहने का प्रयास करेगी. बस भय इस बात का रहेगा कि अब बीजेपी या शिवसेना अपनी मनमानी न करने लगे. एनसीपी के सरकार में रहने या न रहने से सरकार को ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा और कुछ पार्टी विधायकों का दल बदल कर शिवसेना और बीजेपी में भविष्य तलाशना भी तय है. ऐसे में यह लग रहा है कि निकट भविष्य में एनसीपी एक बार फिर अपने पुराने अस्तित्व में लौटने की तैयारी करेगी. हालांकि अजित पवार का न होना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका और अपूरणीय क्षति साबित हो सकता है.