महाराष्ट्र: सुनेत्रा के डिप्टी सीएम बनने पर बैकफुट पर हैं शरद पवार, आखिर क्यों?

1 Feb 2026

महाराष्ट्र की राजनीति के 65 वर्षों में पहली महिला सीएम/डिप्टी सीएम बनी सुनेत्रा पवार, पार्थ के राज्यसभा जाने की अटकलें भी तेज, सदमे में शरद पवार

महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को इतिहास तब रचा गया, जब स्व.अजित पवार के स्थान पर उनकी धर्मपत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य का डिप्टी सीएम बनाया गया. सुनेत्रा महाराष्ट्र की पहली महिला सीएम/डिप्टी सीएम बनीं. अजित 'दादा' के जाने के बाद पार्टी में हो रही उथल पुथल को संभालने के लिए उनके निधन के चौथे दिन ही ये कदम उठाया गया. डिप्टी सीएम पद की शपथ लिए जाने से पहले उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया. अब उन्हें आगाकी 6 माह में विधायकी या परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होगा. इसके दूसरी तरफ, सुनेत्रा के डिप्टी सीएम बनने से एनसीपी (एकजुट) के पूर्व मुखिया शरद पवार स्वयं को बैकफुट पर महसूस कर रहे हैं. इसकी बानगी ये है कि परिवार की बहू के शपथ समारोह में न तो शरद पवार और न ही सांसद सुप्रिया सूले ही उपस्थित रहीं.

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शपथ ग्रहण में न पहुंचने की वजह बताते हुए शरद पवार ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई. ऐसा कहकर उन्होंने बात से पल्ला तो झाड़ लिया लेकिन अपनी मनोव्यथा को नहीं छुपा सके. शनिवार को ही उन्होंने मीडिया में एक बयान दिया था कि एनसीपी को एकजुट देखना अजित पवार का सपना था, जो फिलहाल पूरा न हो सका. इस एक वाक्य में उन्होंने अपनी छिपी कुंठा को जग जाहिर कर दिया. असल में उन्हें इस बात की पूर्व भनक न लगने देना शरद की नाराजगी की असल वजह है.

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दरअसल, सुनेत्रा का डिप्टी सीएम बनना इसी बात की ओर भी इशारा है कि अब पार्टी का नेतृत्व भी सुनेत्रा पवार ही करेंगी. सुनी सुनाई बात पर विश्वास करें तो सुनेत्रा एवं अजित के बड़े सुपुत्र पार्थ पवार, जो राजनीति में कदम रख चुके हैं, अब सुनेत्रा की सीट पर राज्यसभा जाएंगे. सुनेत्रा न केवल सरकार का हिस्सा होंगी, बल्कि उनके महत्वपूर्ण प्रभार भी अपने पास रखेंगी. फिलहाल वित्त विभाग उन्हें न दिए जाने की चर्चा है लेकिन जल्द ही ये भी उनके पास होगा.

इसी एंगल से शरद पवार की ओर देखा जाए तो सुनेत्रा के बीच में न आने से पूर्व पार्टी अगर विलय होती तो एनसीपी के सर्वेसर्वा केवल और केवल शरद पवार ही होते. पार्टी के भविष्य की बागड़ोर अपनी सुपुत्री सुप्रीया सूले को सौंपने के चलते ही अजित ने बगावत की और पार्टी को तोड़ा था. ऐसे में सुनेत्रा अपने बच्चों के साथ ये अन्याय कैसे होने देती. एनसीपी के छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कुछ वरिष्ठ नेता भी अब शरद पवार के अंगुठे के नीचे दबे रहना नहीं चाहते. यही वजह है कि एनसीपी का एक गुट विलय पर असहमति जता रहा है.

चूंकि अब सुनेत्रा को विधायक दल का नेता और एनसीपी प्रमुख बनाया जा चुका है, एनसीपी का विलय दूर की कोड़ी साबित होते नजर आ रहा है. शरद पवार का एकजुट 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी' को फिर देख पाने का सपना भी धूमिल हो रहा है. अजित के वरिष्ठ नेताओं का पर्दे के पीछे का ये खेल अब शरद पवार के लिए भी चुनौती बन गया है. अब आगे क्या होगा और महाराष्ट्र की राजनीति किस करवट बैठेगी, ये तो आने वाला वक्त ही बता पाएगा.