महाराष्ट्र में नया सियासी खेल: राष्ट्रीय मंच पर ‘इंडिया’ बनाम एनडीए मालेगांव में ‘बीजेपी-हाथ’ एक साथ

1 Feb 2026

एक-दूसरे को राजनीतिक विरोधी बताते वाले अब साथ-साथ, मालेगांव में कांग्रेस को तीन और बीजेपी को मिली दो सीट, बैकफुट पर होने के बावजूद 'वजूद' बनाने की कोशिश

राष्ट्रीय मंच पर जो कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक-दूसरे को सियासत में आपसी विरोधी बताते रहे हैं, एक-दूसरे पर लगातार जुबानी विषैले हमले कर रहे हैं, उसी बीजेपी और कांग्रेस ने मालेगांव नगर निगम में आपस में हाथ मिलाया है. महाराष्ट्र के निकाय चुनाव के नतीजों के बाद राजनीति का यह दिलचस्प चेहरा सामने आया है, जहां कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर 'भारतीय विकास आघाड़ी' नाम से साझा गुट बना लिया है. इतना ही नहीं, इस गुट को अधिकारिक पंजीकृत भी किया गया है. मालेगांव नगर निगम में कांग्रेस को तीन और बीजेपी को दो सीटें मिली थीं. यह संख्या भले ही छोटी हो, लेकिन दोनों दलों ने साथ आकर अपने प्रभाव को बढ़ाने की रणनीति अपनाई है. (Bharatiya Vikas Aghadi – BVA)

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुट का नेता कांग्रेस शहर अध्यक्ष एजाज बेग को बनाया गया है, जबकि बीजेपी के मदन गायकवाड़ को उपनेता की जिम्मेदारी सौंपी गई है. गायकवाड़ ने भी स्पष्ट किया कि यह फैसला पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सहमति से लिया गया है. वहीं एजाज बेग का कहना है कि पांच पार्षदों का यह गुट सामूहिक रूप से फैसले लेगा और नगर निगम की स्थायी समिति में दोनों दलों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा.

मालेगांव में किसी को नहीं मिला बहुमत

84 सदस्यों वाली मालेगांव नगर निगम में इस बार इस्लाम पार्टी (ISLAM Party) 35 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. उसके बाद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को 21, शिवसेना को 18, समाजवादी पार्टी को पांच सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस और बीजेपी क्रमशः तीन और दो सीटों पर सिमट गईं. इस्लाम पार्टी पार्टी बहुमत के करीब पहुंचने की कोशिश में AIMIM के साथ गठबंधन पर विचार कर रही है, लेकिन कांग्रेस-बीजेपीका यह कदम स्थानीय राजनीति में नया समीकरण बना सकता है.

सियासी घटना से चौंके राजनीतिक पंडित

यह घटना राजनीतिक पंडितों के लिए चौंकाने वाली है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे जमकर जुबानी प्रहार करती रहती हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर सत्ता और प्रभाव के लिए सिद्धांतों को ताक पर रख दिया गया है. केंद्र में जहां ‘इंडिया बनाम ‘एनडीए का महायुद्ध चल रहा है, वहीं मालेगांव में भाजपा और कांग्रेस ने विरोध का झंडा उठाने के बजाय हाथ मिला लिया. माना जा रहा है कि यह ग्रुप निगम में फैसलों पर प्रभाव डालने, कमेटियों में जगह हासिल करने और स्थानीय मुद्दों पर अपनी आवाज मजबूत करने के लिए बनाया गया है.

हालांकि इससे पहले भी महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों के पश्चात् कुछ इसी तरह का वृतांत हुआ था, जिस पर बीजेपी और कांग्रेस, दोनों पार्टियों ने तुरंत एक्शन लिया था. इस बार ऐसा कुछ होगा या राजनीतिक सदभाव की चादर तले ये सियासी खेल चलता रहेगा, देखने वाली बात होगी.