देश में आए लोकसभा चुनाव के नतीजों में पीएम मोदी की सुनामी एक बार फिर देखने को मिली. बीजेपी ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए 542 में से 303 सीटों पर फतह हासिल की. बीजेपी ने राजस्थान में 2014 की तरह क्लीन स्वीप करते हुए सभी 25 सीटें हासिल करने में सफलता प्राप्त की. प्रदेश में केवल छह महीने पहले ही सत्ता पर काबिज होने के बावजूद लोकसभा चुनाव में उसका सूपड़ा साफ हो गया. इस करारी हार ने राजस्थान के कई नेताओं की राजनीति को समाप्ति के मुहाने पर पहुंचा दिया है. आइए जानते हैं इन नेताओं के बारे में-

रतन देवासी:
रतन देवासी ने जालोर-सिरोही लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. उनका सामना बीजेपी के दो बार के सांसद देवजी पटेल से था. चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी देवजी पटेल ने उनको भारी वोट अंतर से मात दी. हालांकि देवासी की यह लोकसभा चुनाव में पहली हार है लेकिन वो इससे पहले दो विधानसभा चुनाव हार चुके है. लगातार हार के बाद अब अगले विधानसभा चुनाव में उनकी टिकट की दावेदारी पर संकट मंडरा रहा है.

सुभाष महरिया:
सीकर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े सुभाष महरिया की हार के बाद उनके राजनीतिक जीवन पर प्रश्नचिन्ह उठने लगे हैं. वो लगातार चार चुनाव हार चुके है. इनमें तीन लोकसभा और एक चुनाव विधानसभा चुनाव शामिल है. वो अपना आखिरी चुनाव 2004 में बीजेपी के टिकट पर जीते थे. उसके बाद बीजेपी के टिकट पर 2009 का लोकसभा चुनाव, 2013 में विधानसभा चुनाव और 2014 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. इस बार महरिया कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में थे लेकिन उन्हें बीजेपी के सुमेधानंद सरस्वती से हार का सामना करना पड़ा. इतनी पराजय के बाद उनका राजनीतिक भविष्य खत्म होता नजर आ रहा है.

रफीक मंडेलियाः
चुरू लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े रफीक मंडेलिया का भी चुनावी करियर अब गर्त में जाता दिख रहा है. मंडेलिया 2009 और 2019 सहित दो लोकसभा चुनाव हार चुके है. इसके अलावा, हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में चुरू सीट से भी उन्हें हार मिली थी. इतनी हार के बाद आने वाले चुनाव में उन्हें टिकट मिलेगा, इस पर संशय है.

बद्री जाखड़ः
पाली लोकसभा सीट पर कांग्रेस के बद्री जाखड़ को करारी हार का सामना करना पड़ा. उन्हें बीजेपी उम्मीदवार पीपी चौधरी ने मात दी. बद्री जाखड़ ने विधानसभा चुनाव में भी टिकट की मांग की थी लेकिन पार्टी ने उनकी मांग को अनसुना किया. इस चुनाव में मिली हार के बाद बद्री जाखड़ का चुनावी करियर समाप्ति की ओर अग्रसर है. इस बार उनके टिकट कटने की संभावना थी लेकिन अशोक गहलोत की पैरवी के बाद उनको टिकट मिला था. 2014 में उनका टिकट काटकर उनकी बेटी मुन्नी देवी को पाली लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया था.

गोपाल सिंह ईडवाः
राजसमंद के पूर्व सांसद गोपाल सिंह ईडवा को पार्टी ने इस बार चितौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया. यहां उनको बीजेपी उम्मीदवार सीपी जोशी ने भारी अंतर से मात दी. गोपाल लगातार दो चुनाव हार चुके है. दो चुनाव हारने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है. लगातार हार के बाद अगले चुनाव में उनका टिकट कटना लगभग तय है.

रघुवीर मीणाः
कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य रघुवीर मीणा लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं. इसमें पिछले छह महीने में दो चुनाव शामिल हैं. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी अमृतलाल मीणा के हाथों हार मिली थी. लगातार तीन हार के बाद उनकी राजनीतिक हैसियत में गिरावट आना तय है.

देवकी नंदन गुर्जरः
सीपी जोशी के करीबी माने जाने वाले देवकी नंदन गुर्जर को लोकसभा चुनाव में बीजेपी की दीया कुमारी से बड़ी हार झेलनी पड़ी. पार्टी ने उन्हें राजसमंद लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था. देवकी 2013 में राजसमंद की नाथद्वारा सीट से विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं. दो चुनावों में मिली हार के बाद देवकी गुर्जर का सियासी करियर अपने अंत की ओर है.

भरतराम मेघवालः
श्रीगंगानगर संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी भरतराम मेघवाल को बीजेपी के निहालचंद मेघवाल से बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. यह हार उनकी लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी हार है. इससे पहले मेघवाल 2009 में यहीं से सांसद चुने गए थे. भरतराम मेघवाल को मिली लगातार दो हार के बाद पार्टी अगले चुनाव में किसी नए चेहरे पर दांव खेल सकती है.

नमोनारायण मीणाः
लगातार दो चुनाव हार चुके नमोनारायण मीणा का चुनावी करियर ढलान की ओर है. उनकी उम्र भी अब आने वाले चुनाव में टिकट की दावेदारी के खिलाफ जाएगी. उन्हें इस बार टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के सुखबीर सिंह जौनपुरिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा. 2014 में मीणा ने दौसा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, जहां वे तीसरे स्थान पर रहे थे. उन्हें अपने भाई हरीश मीणा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

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