शिवराज के तीन मंत्रियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में कमलनाथ सरकार

PoliTalks news
13 Apr 2019
मध्यप्रदेश के बहुचर्चित ई-टेंडर घोटाले में ओस्मो कंपनी के संचालकों की गिरफ्तारी के बाद और कई खुलासे होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई नेता, अफसर और ठेकेदारों के नाम सामने आएंगे. सरकार ने इस मामले में 2014 से लेकर अब तक के साढ़े तीन लाख टेंडरों की जांच कराने का फैसला किया है. आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू 2015 से लेकर 2018 तक के टैंडर्स की जांच विशेष रूप से करेगी. ईओडब्ल्यू ने मैप आईटी से सभी टेंडरों का ब्यौरा मांगा है. माना जा रहा है कि साढ़े तीन लाख टेंडरों में हजारों ऐसे टेंडर हैं, जिसमें इसी कंपनी के जरिए फर्जीवाड़ा किया गया है. उसे आशंका है कि ये घोटाला अरसे से चल रहा था. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और कई बड़े खुलासे होने के साथ शिवराज सरकार के तीन मंत्री जांच के दायरे मेें आ गए हैं. इसके साथ भाजपा के कई नेताओं, अफसरोंं और कई बड़े कांट्रेक्टर्स के नाम सामने आने के आसार हैं. आपको बता दें कि शिवराज सरकार के दौरान 2014 में ई-टेंडरिंग व्यवस्था की शुरुआत हुई थीं. उस समय विधानसभा में कांग्रेस ने इस मामले को बड़े जोर-शोर उठाया था. जांच की मांग की थी. कमलनाथ द्वारा 14 जून 2018 को तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह को पत्र लिखकर इस घोटाले की जांच कराने व दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी, लेकिन जांच नहीं हो पाई. सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि इस मामले की जांच होगी. इसकी सुगबुगाहट कई दिनों से थी, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ और उनके पूर्व सलाहकार आरके मिगलानी के कई ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों के बाद सब कुछ फटाफट हुआ. गुरुवार ईओडब्ल्यू की टीम ने भोपाल की सॉफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा और उसके तीन डायरेक्टरों को गिरफ्तार किया. ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड सरकार के ई-टेंडरिंग पोर्टल में ऑनलाइन टेंडरिंग प्रोसेस में तकनीकी और सॉफ्टवेयर के लिए मदद करती थी. ईओडब्ल्यू को शक है कि कंपनी ने पहले भी इसी तरीके से दूसरे टेंडरों में भी घोटाला किया होगा. एक-दो दिन में पुराने टेंडरों के खुलासे होने के आसार हैं. शिवराज के तीन प्यादे घेरे में घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब शिवराज सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा, कुसुम मेहदेले और रामपाल भी जांच के दायरे में आ गए हैं. जिन पांच विभागों के 9 टेंडरों में 3000 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला हुआ है, उन विभागों की जिम्मेदारी कुसुम मेहदेले, नरोत्तम मिश्रा और रामपाल पर थी. ईओडब्ल्यू ने मामले में अज्ञात राजनेताओं पर एफआईआर दर्ज की है. ईओडब्ल्यू के मुताबिक जल निगम और पीएचई में सबसे ज्यादा घोटाला हुआ है. पीएचई विभाग की तत्कालीन मंत्री कुसुम मेहदले ने इस मामले का ठीकरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर फोड़ा है. मेहदले ने कहा कि पेयजल के लिए एक हजार करोड़ रुपए के ई-टेंडर पर उन्होंने नहीं बल्कि शिवराज सिंह चौहान ने हस्ताक्षर किए थे. मेहदले ने कहा कि यह टेंडर पीएचई से नहीं बल्कि जल निगम से जारी किए गए थे. किस विभाग में कितने का घोटाला जानकारी के मुताबिक जल निगम में 1800 करोड़, सडक़ विकास निगम में 8 करोड़, लोक निर्माण विभाग में 14 करोड़, जल संसाधन विभाग में 1135 करोड़ और पीआईयू में 15 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला हुआ है. इस मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद गुरुवार को मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने सुबह ही संबंधित विभागों के अफसरों को तलब किया और मामले से जुड़ी फाइलें बुलवाई. इसके साथ ही विभागों के प्रोजेक्ट संबंधित जानकारी भी अफसरों से मांगी गई है. कमलनाथ सरकार इस मामले में एक्शन में दिख रही है. सीएम अपने स्तर पर भी इस मामले की जांच करवा रहे हैं. एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अफसरों को आरोप पत्र भी जारी करने की तैयारी है.