Politalks.News/PunjabAssemblyelection. आगामी 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का एलान हो चूका है. सभी राजनीतिक दल नई रणनीति के तहत चुनावी रण में आगे बढ़ रहे हैं. पंजाब विधानसभा चुनाव की अगर बात की जाये तो यहां आम आदमी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों से एक कदम आगे निकली. आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को अपने मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा कर दी.
आम आदमी पार्टी इस विधानसभा चुनाव में पार्टी के लोकसभा सांसद भगवंत मान के चेहरे पर चुनाव लड़ने वाली है. मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर मान संगरूर लोकसभा क्षेत्र की धुरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं. आखिर पंजाब में आम आदमी पार्टी के सीएम चेहरे भगवंत मान कॉमेडी करते करते कैसे राजनीति करने लगे जानिये हमारी इस ख़ास रिपोर्ट में.
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भगवंत मान को
बतौर कॉमेडियन और एक राजनेता के रूप में जनता के बीच पहचाने जाते हैं. वे पंजाब में संगरूर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार आम आदमी पार्टी के सांसद हैं. वो पार्टी की पंजाब इकाई के प्रदेश अध्यक्ष हैं. मंगलवार को पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने आप पार्टी की तरफ से भगवंत मान का नाम मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में घोषित किया. भगवंत मान संगरूर लोकसभा क्षेत्र के अंतरगत आने वाले धुरी विधानसभा सीट से किस्मत आजमाते हुए नज़र आएंगे. तभी उनकी राजनीति में जो विपक्षी दलों पर कटाक्ष होते हैं वह थोड़े व्यंग्यात्मक रूप से दिखाई देते हैं.
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भगवंत मान का जन्म
17 अक्टूबर 1973 को पंजाब के
संगरूर जिले शीमा मंडी के करीब
सतोज गांव में हुआ था. उनके
पिता महिंदर सिंह एक सरकारी अध्यापक थे और मां हरपाल कौर गृहिणी हैं. चुनावी हलफनामे की बात करें तो उसमें बताया गया है कि मा
न ने 12वीं कक्षा पास की है. स्नातक की पढ़ाई पूरी कर
मान कॉमेडी के क्षेत्र में आ गए. संगरुर के सुनाम शहीद उधम सिंह कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने कॉमेडी और कविता में कई प्रतियोगिताएं जीती. इसके साथ ही वे प्रोफेशनल कॉमेडियन बन गए.
उनकी पहली कॉमेडी और गानों की पैरोडी की टेप
1992 में 'गोबी दी ए कच्चिए व्यापारने' आई थी और वे कॉमेडी की दुनिया में छा गए. भगवंत मान के अगर वैवाहिक जीवन की अगर बात की जाए तो उन्होंने इंद्रप्रीत कौर से शादी रचाई लेकिन उनका विवाह ज्यादा दिन नहीं चल पाया और वर्ष 2015 में दोनों अलग हो गए.
जमीन से जुड़े हुए हैं भगवंत मान
भगवंत मान के बारे में जनता से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि,
'मान जनता और जमीन से जुड़े हुए नेता हैं. उन्हें अच्छे से पता है कि जनता की समस्या क्या है और वे मुख्यमंत्री बनने पर उनका समाधान भी उसी तरह करेंगे.' भगवंत मान के राजनीतिक जीवन की अगर बात की जाए तो 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पूर्व भगवंत मान पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब से जुड़े थे. मान ने 2012 में चुनावी किस्मत आजमाने के लिए इसी पार्टी में रहते चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा.
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नहीं है कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज
2019 में दिए एक हलफनामें के अनुसार भगवंत मान के खिलाफ कोई भी आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है. इसी हलफनामे में उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि
उनकी कमाई का जरिया सांसद के तौर पर मिलने वाला मानदेय है. साथ ही किराया और बैंक में जमा पूंजी से ब्याज मिलता है. साथ ही उन्होंने ये भी साफ़ किया कि उनके पास
1,64,27,274 रुपये की कुल संपत्ति हैं और उनकी किसी प्रकार की कोई देनदारी नहीं है. उनके पास 20 लाख रुपये से अधिक मूल्य की दो गाड़ियां भी हैं.
पंजाब की सियासी गणित
पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत की मजबूत दावेदार मानी जा रही कांग्रेस जहां आंतरिक कलह से जूझ रही है. वहीं सूबे के अन्य दलों को ये साफ़ पता है कि वह किसी भी हालत में सत्ता में वापसी नहीं कर सकती. लेकिन प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी और धीरे धीरे प्रदेश की सियासत में पैठ जमा रही आम आदमी पार्टी बड़ी ही मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है. जहां कांग्रेस में तीन तीन मुख्यमंत्री चेहरे हैं उनमें से किसी एक का नाम तय करना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है. वहां आम आदमी पार्टी ने सभी दलों से एक कदम आगे निकलते हुए अपने मुख्यमंत्री चेहरे का एलान कर सभी को चौंका दिया है.