सरकार की तानाशाही और खराब मौसम हमारे इरादों को नहीं कर सकता कमजोर : हनुमान बेनीवाल

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4 May 2025
राजस्थान में एसआई भर्ती को रद्द कराने, आरपीएससी को भंग करवाने सहित संगठित भ्रष्टाचार, पेपर लीक, और फर्जी अभ्यर्थियों की भर्ती के खिलाफ नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन आज आठवां दिन है. जयपुर के शहीद स्मारक पर डटे हुए सैकड़ों कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों के बीच पार्टी संयोजक एवं सांसद बेनीवाल ने आगामी दिनों की रणनीति पर बात करते हुए सरकार के दोहरे रवैये पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कल तो सिर्फ झलक थी, अब एक लाख लोगों के साथ मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. https://www.youtube.com/watch?v=89jCzjwyQwo यह भी पढ़ें: MLA जयकृष्ण पटेल की गिरफ्तारी पर हनुमान बेनीवाल ने दिया बड़ा बयान, देखें क्या कहा? सांसद बेनीवाल ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा, 'मैंने लोकतंत्र को बचाने के लिए सांकेतिक गिरफ्तारी दी लेकिन जरूरत पड़ने हम पूरी ताकत दिखाएंगे. मंत्रियों के दबाव में सीएम भजनलाल सही निर्णय नहीं कर पा रहे है, लेकिन ये बात स्पष्ट कर दूं कि इस बार भजनलाल जी को एसआई भर्ती रद्द करनी ही पड़ेगी.' एसओजी पर तीखा पलटवार सांसद बेनीवाल ने एसओजी पर करारा हमला करते हुए कहा कि एसओजी द्वारा आरएलपी और आंदोलनकारी युवाओं को झूठा ठहराना निंदनीय है, जबकि हकीकत यह है कि संस्था स्वयं कोर्ट में असत्य भाषण दे चुकी है. उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से एडीजी वी.के. सिंह को पत्र लिखा गया था कि वे एसआई भर्ती रद्द करने की अनुशंसा करें, लेकिन जब कोर्ट ने उनसे सवाल किया कि क्या यह निर्णय सरकार द्वारा निर्देशित था, तो उन्होंने झूठ बोलते हुए कहा कि यह उनका स्वयं का निर्णय था. ऐसे में बेनीवाल ने सरकार से सवाल पूछा कि क्या यह कानून और न्याय की खुली हत्या नहीं है. खनन नीति में किसानों के साथ अन्याय नागौर सांसद ने सरकार पर खनन नीति में किसानों के साथ अन्याय का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जिन किसानों की जमीन में लाइमस्टोन या सैंडस्टोन मौजूद है, उन्हें खुद की ज़मीन पर खनन करने से रोका जा रहा है, जबकि वे कोई बहुमूल्य धातु नहीं निकाल रहे. हनुमान बेनीवाल ने सरकार से छोटी माइंस के नियम सरलीकरण करने, किसानों को उनकी जमीन से लाभ कमाने का अधिकार देने और खनन के क्षेत्र में किसानों के लिए स्पष्ट एवं सरल नीति बनाए जाने की मांग की है.