‘…आपने किसकी सलाह से ऐसा फैसला किया’- गहलोत ने विधानसभा के नए दिशा-निर्देशों पर कही बड़ी बात

ashok gehlot
17 Jan 2026
राजस्थान विधानसभा के आगामी सत्र के लिए जारी किए गए नए दिशा-निर्देश पर भड़के अशोक गहलोत, 28 जनवरी से शुरू होने जा बजट सत्र में किए गए है 3 तरह के बदलाव, विधायक पांच 1 वर्ष से अधिक पुराने मामलों पर प्रश्न नहीं पूछेंगे, सवाल राज्य या जिला स्तर 2 के नहीं होंगे, सवाल किसी 3 विशेष स्थान, विधानसभा क्षेत्र या तहसील स्तर तक रहेंगे, एक प्रश्न में 4 तीन-चार बिंदुओं से अधिक शामिल नहीं किए जा सकेंगे, इसे लेकर अशोक गहलोत ने कहा- अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत हैं, माननीय विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी जी, आपने किसकी सलाह से ऐसा फैसला किया जिसको लेकर सभी विधायकों एवं जनता में प्रतिक्रिया तथा आक्रोश होना स्वाभाविक है, विधायक (Lawmaker) केवल एक क्षेत्र विशेष का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का प्रतिनिधि होता है, उसे राज्य स्तर के नीतिगत विषयों या 5 साल पुराने मामलों पर प्रश्न पूछने से रोकना, और मंत्रियों को जवाबदेही से 'छूट' देना, सदन की गरिमा को कम करने जैसा है, गहलोत ने आगे कहा- लोकतंत्र में विपक्ष और विधायकों का काम सरकार की जवाबदेही तय करना है,यदि प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता ही नहीं रहेगी, तो विधानसभा का औचित्य क्या रह जाएगा? यह अलोकतांत्रिक व्यवस्था कतई स्वीकार्य नहीं है, विधायिका का काम कार्यपालिका पर अंकुश रखना है, न कि कार्यपालिका की सुविधा अनुसार अपने अधिकार कम करना, ऐसा आदेश संभवतः देश में पहली बार निकाला गया होगा जिससे विधायकों के अधिकारों को कम किया जा रहा है, बाक़ी विधानसभाएं अपने सदस्यों के अधिकार बढ़ाने का प्रयास करती हैं परन्तु यहां इसके विपरीत देखने को मिल रहा है, विधायकों को राज्य स्तर के सवाल पूछने से रोकना और मंत्रियों को जवाबदेही से मुक्त करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। ऐसे आदेश को अविलंब वापस लेना चाहिए