मनरेगा के मुद्दे पर कांग्रेस अब मुखर हो रही है. कांग्रेस ने शनिवार को ऐलान किया कि 8 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत करेगी. कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश और कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये जानकारी दी. ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत ग्राम स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कई कार्यक्रम करने के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में 4 बड़ी जनसभाएं आयोजित की जाएंगी. पार्टी का कहना है कि उसके इस ‘संग्राम’ का मकसद यह है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) बहाल हो और नए कानून को वापस लिया जाए.
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस का यह अभियान 25 फरवरी तक जारी रहेगा. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मनरेगा की जगह लाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के तहत सिर्फ ‘विनाश भारत’ और योजना के केंद्रीकरण की गारंटी दी गई है. उन्होंने कहा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ दिल्ली केंद्रित नहीं, बल्कि पंचायत, उपखंड और जिला केंद्रित है. उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून को कांग्रेस कोर्ट में चुनौती भी देगी.
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कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की 27 दिसंबर को हुई बैठक में मनरेगा के पक्ष में अभियान शुरू करने का फैसला किया गया था. वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा कि नया कानून इस तरह से बनाया गया है ताकि मनरेगा को खत्म किया जा सके. कोविड और कई दूसरे संकटों के समय मनरेगा एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर सामने आया था. उनके मुताबिक, ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के तहत सब कुछ केंद्र सरकार तय करेगी और गांव में रहने वालों को इसकी मार झेलनी पड़ेगी। वेणुगोपाल ने कहा कि नए कानून के तहत कार्य दिवस को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की बात की गई है, लेकिन यह दावा गलत है, क्योंकि केंद्र के हिस्से में धन आवंटन का अनुपात 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है.
जयराम रमेश ने दावा किया कि किसान आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार को पहले भी 3 कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था और मनेरगा बचाओ संग्राम सफल होगा. आपको बता दें कि संसद ने विपक्ष के हंगामे के बीच बीते 18 दिसंबर को ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025′ को मंजूरी थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद अब यह अधिनियम बन चुका है। यह 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेगा।



























