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करीब चार पहले अटके नागरिकता संशोधन अधि​नियम (सीएए) पर एक बार फिर से बहस शुरु हो गयी है. कुछ साल पहले ठंडे बस्ते में जा चुका यह अधिनियम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद फिर से चर्चा में आ गया जिसमें शाह ने कहा कि सीएए को आम चुनाव से पहले ही देशभर में लागू किया जाएगा. उन्होंने फिर से सफाई देते हुए कहा कि सीएए में नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है.

एक बिजनेस समिट में बोलते हुए अमित शाह ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर आरोप जड़ते हुए कहा कि जब कई देशों में अल्पसंख्यक लोगों पर अत्याचार हो रहे थे, तो कांग्रेस ने रिफ्यूजियों को भरोसा दिलाया था कि वे भारत आ सकते हैं. उन्हें यहां की नागरिकता दी जाएगी, लेकिन अब कांग्रेस अपनी बात से मुकर रही है. शाह ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर कहा कि धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म आधारित नागरिकत संहिता नहीं हो सकती है लेकिन कांग्रेस ने तुष्टिकरण के कारण इसे नजरअंदाज कर दिया था. 

गृहमंत्री ने आगे कहा कि हमारे देश के अल्पसंख्यक समुदायों, खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को उकसाया जा रहा है. सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट या नागरिकता संशोधन अधि​नियम किसी की सिटिजनशिप नहीं छीन सकता है, क्योंकि इसमें ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है. सीएए ऐसा एक्ट है जो बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अत्याचार सह रहे रिफ्यूजियों को नागरिकता दिलाएगा.

क्या है सीएए

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सीएए में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर, 2014 से पहले आने वाले छह अल्पसंख्यकों हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. इसके लिए दस्तावेज देने की भी जरूरत नहीं है. पात्र विस्थापितों को सिर्फ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. गृह मंत्रालय जांच करके नागरिकता जारी कर देगा. यह ​अधिकार पूरी तरह से केंद्र का होगा.

बीते चार साल से लटका है विधेयक

संसद ने दिसंबर, 2019 में संबंधित विधेयक को मंजूरी दी थी. राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसके विरोध में कई प्रदर्शन हुए. विरोध प्रदर्शन और कोरोना काल के चलते तब केंद्र सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था. अब मोदी सरकार इसे लागू करने का मन बना चुकी है. यहां यह बताना भी जरूरी है कि सीएए का सबसे अधिक विरोध मुस्लिम कर रहे हैं. दरअसल, बाहर से आने वाले अल्पसंख्यकों में मुस्लिमों को नागरिकता से बाहर रखा गया है.

विपक्षी धड़ों का मानना है कि ऐसा करना मु​स्लिमों के साथ भेदभाव है जबकि सरकार का कहना है कि दुनियाभर में मुस्लिमों के लिए कई देश हैं लेकिन हिन्दू समुदाय के लिए केवल यही एक देश शेष है. ऐसे में हिन्दु अल्पसंख्यकों को सहारा दिया जाना चाहिए. कोरोना काल से एकदम पहले दिल्ली में सीएए के लेकर जबरदस्त धरना प्रदर्शन किया गया था. अब देखना होगा कि मोदी सरकार ​सीएए को किस तरह से लागू कर पाती है.

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