पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर केंद्र सरकार गंभीर नहीं : सांसद हनुमान बेनीवाल

2 Feb 2026

लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ/ESA) में हो रहे अनियंत्रित, अनियोजित निर्माण और अवैज्ञानिक बुनियादी ढांचे को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण देश के कई राज्यों में गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो रहा है।.

सांसद बेनीवाल ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्रश्न करते हुए हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हुई भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया और इन्हें सीधे तौर पर अव्यवस्थित विकास से जोड़ा।

प्रश्न के उत्तर में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों और आसपास के भूदृश्यों के लिए एक तरह के “शॉक एब्जॉर्बर” के रूप में कार्य करना है, जिससे जैव विविधता और वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके. उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित राज्यों को दो वर्षों के भीतर जोनल मास्टर प्लान तैयार करना अनिवार्य है, जिसमें निषिद्ध, विनियमित और अनुमेय गतिविधियों का स्पष्ट उल्लेख होता है.

मंत्री ने यह भी बताया कि इन क्षेत्रों में वाणिज्यिक खनन, बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे.

“सरकार ने मूल विषय को भ्रमित किया”

सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार के जवाब पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जवाब से साफ है कि केंद्र सरकार पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है. सांसद बेनीवाल ने कहा कि जिन नियमों का उल्लेख सरकार ने किया, उनकी जानकारी सबको है, लेकिन उनका पालन जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा.

बेनीवाल ने आगे आरोप लगाया कि मंत्री ने जवाब में यह नहीं बताया कि पर्यटन, विद्युत परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के नाम पर इन संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण की जो अनुमतियां मंत्रालय ने दी हैं, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है. उन्होंने कहा कि यह प्रयास मूल मुद्दे को भटकाने वाला है.

सांसद बेनीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर विनाश को न्योता देना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है. हाल की प्राकृतिक आपदाओं ने साबित कर दिया है कि पर्यावरण से खिलवाड़ का खामियाजा आम जनता को जान-माल के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है. वही अंत में बेनीवाल ने मांग की कि सरकार को प्रकृति संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ही विकास योजनाओं को मंजूरी देनी चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण मिल सके.