



वहीं आप सांसद संजय सिंह ने विजय गोयल पर तंज मारते हुए कहा कि अगर इस फॉर्मूले से कोई फ़ायदा नहीं तो योगीजी यूपी में इसे क्यों लागू कर रहे हैं? अब एक लाइन योगी के ख़िलाफ़ भी बोल दो या प्रदूषण से लड़ने की शिक्षा अरविंद केजरीवाल से लेते रहो.पीएम @narendramodi_in जी आपने स्वच्छ भारत अभियान चलाया तो @ArvindKejriwal जी और हमारी पार्टी के लोगों ने झुग्गी बस्तियों में सफाई करके आपके अभियान का साथ दिया क्या प्रदूषण रोकने के लिए ऑड-ईवन अभियान चलाना गलत है? :-@SanjayAzadSln#BJPAgainstCleanAirhttps://t.co/Qug0XDCAXL
— Ashutosh Ojha (@Aojhaaap) November 4, 2019
.@VijayGoelBJP जी Odd-Even से कोई फ़ायदा नही तो योगी जी यूपी में Odd-Even क्यों लागू कर रहे हैं? अब एक लाइन योगी के ख़िलाफ़ भी बोल दो या प्रदूषण से लड़ने की शिक्षा @ArvindKejriwal से लेते रहो https://t.co/2Xm7TxuPib — Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) November 4, 2019राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और कोहरे से पिछले कई सालों से हालत सोचनीय स्थिति में पहुंच गयी है. इससे निपटने के लिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक बार पहले भी शहर की सड़कों पर ऑड-ईवन फॉर्मूले (Aud-Even in Delhi) से कार चलाने की स्कीम चलाई थी. सरकार की रिपोर्ट के अनुसार ये कारगर रही थी और प्रदूषण में 30 फीसदी की कमी आयी लेकिन भाजपा ने हर बार इसका विरोध किया. यहां तक कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया. अब बोटल में बंद ऑड-ईवन का ये जिंद फिर से बाहर आ गया है जिसका फिर से भाजपा पूरजोर कर रही है. यह भी पढ़ें: हरियाणा-महाराष्ट्र की तर्ज पर स्थानीय मुद्दों को भुनाने की तैयारी में केजरीवाल भाजपा सांसद विजय गोयल ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह नियम सिर्फ नौटंकी है. केजरीवाल सरकार कहती है कि पराली जलने के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है तो ऑड-ईवन से प्रदूषण कैसे रूक जाएगा. मैं जुर्माना भरने के लिए तैयार हूं. गोयल ने ऑड-ईवन (Aud Even in Delhi) को महज चुनावी मुद्दा बताया. जब विजय गोयल से सवाल किया गया कि केंद्र में आपकी सरकार है फिर आप क्यों नहीं इस पर काम करते तो गोयल ने कहा कि हमसे केजरीवाल सरकार मदद नहीं मांग रही है. प्रदूषण खत्म करने के प्रति उनका नजरिया चुनावी है. वे इसका लाभ लेना चाहते हैं. वहीं दूसरी ओर, प्रदूषण को लेकर राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं. इसी क्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि दिल्ली सरकार ने केवल विज्ञापन पर 1500 करोड़ बर्बाद कर दिए. सीएम केजरीवाल ने उनके इन आरोपों को झूठ और बेबुनियाद बताया.
इससे पहले सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में फसल जलाने से निकले धुंए के कारण दिल्ली गैस चैंबर में बदल चुकी है. यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हम इस जहरीली हवा से खुद को बचाएं. उन्होंने इसके लिए पराली जलाने को लेकर पंजाब व हरियाणा को जिम्मेदार बताया. इस पर पलटवार करते हुए जावड़ेकर ने कहा, 'दिल्ली के मुख्यमंत्री दिल्ली के प्रदूषण पर राजनीति कर रहे हैं और पंजाब व हरियाणा को पराली जलाने के लिए दोषी ठहरा रहे हैं. अगर दोषी ठहराने का खेल शुरू होता है तो बहुत-सी छिपी चीजें बाहर आएंगी. दूसरों को दोष देने के बजाय लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सभी के बीच सहयोग का प्रयास होना चाहिए'.यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री @ArvindKejriwal #वायुप्रदूषण के मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं और छात्रों को हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के लिए उकसा रहे हैं ताकि उन्हें नाकाम और खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जाए।#AirPollution pic.twitter.com/pkJrkvAi1d
— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) November 2, 2019
#वायुप्रदूषण का समाधान ‘स्विच ऑन’ और ‘स्विच ऑफ’ करने जैसा नहीं है। यह निरंतर प्रयास है जो प्रदूषण को कम करेगा। #वायुप्रदूषण से निपटने के लिए सभी राज्य एजेंसियों और लोगों को इस प्रयास में भाग लेने की आवश्यकता है। #AirPollution — Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) November 2, 2019राजधानी दिल्ली में फैले प्रदूषण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए पराली जलाने पर एक्शन लेने की बात कही. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर साल दिल्ली चोक हो जाती है और हम कुछ नहीं कर पा रहे. सर्वोच्य न्यायालय ने ये भी कहा कि लोगों को जीने का अधिकार है. एक पराली जलाता है और दूसरे के जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है. राज्य सरकारों को चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी है लेकिन यहां पर लोग मर रहे हैं. किसी भी सभ्य देश में ऐसा नहीं होता. केंद्र सरकार करे या फिर राज्य सरकार, इससे हमें मतलब नहीं है. कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकार को लताड़ लगाते हुए उन लोगों के नाम मांगे हैं जो पराली जला रहे हैं. साथ ही ग्राम प्रधान और सरपंचों के खिलाफ एक्शन लेने तथा केंद्र एवं राज्य सरकार से एक्शन प्लान के बारे में पूछा है. इस मामले में पर्यावरण विशेषज्ञ सुनीता नारायण ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट फाइल की जिसमें उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार को एनवायरमेंट डिपार्टमेंट, IIT दिल्ली के एक्सपर्ट से राय लेनी चाहिए. रिपोर्ट में सभी राज्यों को पराली जलाने पर रोक लगाने की बात भी कही गई है. बता दें, दिल्ली और उससे सटे इलाकों में दिवाली के बाद से ही कोहरा छाया हुआ है. प्रदूषण लगातार खतरनाक हो रहा है जिसकी वजह से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं. दिल्ली में AQI खतरे के निशान से काफी ऊपर हो गया था. इससे निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन फॉर्मूला (Aud-Even in Delhi) लागू किया है जिसके तहत एक दिन ऑड और एक दिन ईवन नंबर की कारें सड़कों पर चलेंगी. दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन नियम के लिए अपने दफ्तरों के समय में बदलाव किए हैं. 21 विभाग सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक और कुछ विभाग सुबह 10:30 से शाम 7 बजे तक काम करेंगे. दिल्ली में 4 नवंबर से 15 नवंबर तक ऑड-ईवन नियम लागू रहेगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी ऑड-ईवन को हरी झंडी दिखा दी है. इस बार प्राइवेट सीएनजी कारों पर भी ऑड-ईवन (Aud-Even in Delhi)लागू होगा. महिलाओं को सुरक्षा के मद्देनजर ऑड ईवन से छूट दी गई है. कोई भी गाड़ी जो महिला चला रही हो जिसमें महिला के साथ 12 साल तक का बच्चा हो, उसे भी छूट मिलेगी. सरकारी गाड़ियों को भी इस फॉर्मूले से बाहर रखा गया है. सरकार ने ऑड-ईवन योजना से दुपहिया वाहनों को छूट देने का फैसला लिया है. लोगों को परेशानी से बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने 2 हजार बसों का इंतजाम भी किया है.


