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किसान आंदोलन को राजनीति का अमली जामा पहनाने का प्रयास कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल!

24 जुलाई 2025
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किसान आंदोलन को राजनीति का अमली जामा पहनाने का प्रयास कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल!

गुजरात में विधानसभा चुनाव को अभी दो साल शेष है लेकिन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अभी से तैयारियां शुरू कर ​ली है. पिछले चुनाव में आप और कांग्रेस पार्टी के तुलनात्मक प्रदर्शन को देखते हुए केजरीवाल ये उम्मीद भी बांधकर बैठे हैं कि पंजाब की तरह यहां भी कांग्रेस को पीछे धकेल उनकी पार्टी बीजेपी के बाद नंबर दो पर आ सकती है. ऐसे में उन्होंने अभी से गुजरात में सत्ता एवं विपक्ष पर तीखा हमला बोलना शुरू कर दिया है. बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह अमीरों की सरकार है, यह अडानी की सरकार है, … Read more

गुजरात में विधानसभा चुनाव को अभी दो साल शेष है लेकिन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अभी से तैयारियां शुरू कर ​ली है. पिछले चुनाव में आप और कांग्रेस पार्टी के तुलनात्मक प्रदर्शन को देखते हुए केजरीवाल ये उम्मीद भी बांधकर बैठे हैं कि पंजाब की तरह यहां भी कांग्रेस को पीछे धकेल उनकी पार्टी बीजेपी के बाद नंबर दो पर आ सकती है. ऐसे में उन्होंने अभी से गुजरात में सत्ता एवं विपक्ष पर तीखा हमला बोलना शुरू कर दिया है. बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यह अमीरों की सरकार है, यह अडानी की सरकार है, हर ठेका अडानी को जाता है. वहीं कांग्रेस के लिए कहा कि कांग्रेस में सब शादी के घोड़े हैं और आप वाले सब लंबी रेस के घोड़े हैं.

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आंदोलन में मारे गए किसानों को मुआवजा दें सरकार

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राज्य के मोडासा में किसानों और पशुपालकों की एक विशाल महापंचायत को संबोधित करते हुए पशुपालक आंदोलन में मारे गए अशोक चौधरी के लिए दो करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की. साबरकांठा और अरावली जिलों में डेयरी किसानों द्वारा 14 जुलाई को किए गए आंदोलन के दौरान बीजेपी की कथित तौर पर दमन नीति की आलोचना करते हुए कहा कि जब पशुपालक अपने अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन करने गए, तो उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे गए. अगर किसान अपना बकाया मांग रहे हैं, तो क्या हमें उनसे बात करनी चाहिए या उन पर हमला करना चाहिए? यह अहंकार की पराकाष्ठा है. इस प्रदर्शन में किसान अशोक चौधरी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गयी थी. इस पर आप द्वारा डेयरी विभाग और गुजरात सरकार से एक-एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की गयी है.

बीजेपी नहीं, कांग्रेस-बीजेपी की सरकार

दिल्ली के पूर्व सीएम ने किसान विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर भाजपा नीति और कांग्रेस की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि गुजरात में बीजेपी की सरकार नहीं है बल्कि कांग्रेस और बीजेपी की सरकार है. 1985 में कांग्रेस की सरकार बनी, कांग्रेस ने किसानों पर गोली चलाई और 10 किसान शहीद हुए. तब से अब तक कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है. केजरीवाल ने सरकार पर मोडासा एवं गुजरात सहकारी समितियों पर लूट और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है.

आंदोलन को सख्ती से निपटाया बीजेपी ने

14 जुलाई को अरावली और साबरकांठा जिलों के हज़ारों पशुपालक हिम्मतनगर स्थित साबर डेयरी पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे. इस दौरान पुलिस और पशुपालकों के बीच झड़प हुई, जिसमें कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव भी किया. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. इस घटना में 77 नामजद और 100 से ज़्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई और 47 पशुपालकों को हिरासत में लिया गया, उसी दिन एक पशुपालक अशोक चौधरी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी. आम आदमी पार्टी अब इन आंदोलनों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है. अरविंद केजरीवाल शायद इन्हीं आंदोलनों के जरिए ही गुजरात में पार्टी की जड़ें मजबूत करने और सत्ता के गलियारों में राह ​तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

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