किसानों के समर्थन में बेनीवाल ने किया बजट भाषण का बहिष्कार तो आम बजट को बताया निराशाजनक

Hanuman
2 Feb 2021
Politalks.News/Rajasthan. आरएलपी के राष्ट्रीय संयोजक व नागौर से लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोमवार को पेश हुए बजट भाषण का न केवल विरोध किया मोदी सरकार के आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की यह बजट कृषि सहित अन्य क्षेत्रों के लिए निराशाजनक रहा है. बेनीवाल ने कहा कि रेलवे सहित अन्य केंद्र से जुड़ी परियोजनाओं व लंबित मामलों को लेकर राजस्थान को भी बजट में निराश होना पड़ा. सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा की कृषि बजट में महज अल्प बढ़ोतरी ओर पीएम किसान सम्मान निधि योजना में बजट को घटाकर 75 से 65 हजार करोड़ कर दिया है वही किसानों के ऋण पर सब्सिडी को घटाकर 21 से 19.5 हजार करोड़ कर दिया जो इंगित कर रहा है की काले कृषि कानूनों को थोपने के बाद भी किसानों को किसी प्रकार की राहत नही दी गई है. इसके साथ ही अन्य फसलों को एमएसपी के दायरे में लाने का कोई विजन सरकार ने अपने इस बजट में नही बताया है. सांसद बेनीवाल ने बजट को लेकर राजस्थान के संदर्भ में बोलते हुए कहा की रेलवे, पेयजल व ईस्टर्न केनाल परियोजना में उपेक्षा करने सहित कई लंबित मामलों को लेकर केंद्र के बजट में राजस्थान को निराशा ही हाथ लगी है. यह भी पढ़ें: ‘कांग्रेस के निशाने पर मोदी का बजट’, राहुल, गहलोत और पायलट ने बताया आम आदमी के साथ धोखा इससे पहले नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कृषि कानूनों के विरोध में और किसान आंदोलन के समर्थन में बजट भाषण के दौरान विरोध प्रदर्शन भी किया. सांसद हनुमान बेनीवाल ने वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण शुरू करते ही वेल में आकर विरोध करना शुरू कर दिया. सांसद बेनीवाल ने कहा आज काले कृषि कानूनों को वापिस लेने की जरूरत है क्योंकी देश का अन्नदाता सड़को पर कड़ाके की ठंड में आन्दोलित है ओर यह कृषि बिल किसानों के खिलाफ है. इसके बाद हनुमान बेनिवाल सदन से वॉकआउट कर दिया. इस दौरान सांसद बेनीवाल के दौरान के हाथ में एक पोस्टर तख्ती भी नजर आई जिस पर लिखा था कि 'किसानी मारने वाले काले कानून को वापस लो.' सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे. बाहर आकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मीडिया को बताया कि किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के लिए मैंने आज वेल में जाकर नारेबाजी की. प्रधानमंत्री जी किसानों ने आपको बड़ी उम्मीद के साथ वोट किया था, लेकिन किसानों पर आप जिस तरह का अन्याय कर रहे हैं वो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसलिए हमने बजट भाषण से वॉकआउट किया. करीब 5 से 10 मिनट तक सदन में नारेबाजी की, इसमें कृषि कानूनों को जमकर विरोध किया गया.