सीएम गहलोत ने नाइट कर्फ्यू, मास्क लगाने सहित अन्य दिशा निर्देशों की कड़ाई से पालना के दिए निर्देश

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23 Nov 2020
Politalks.News/Rajasthan/AshokGehlot. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी जिला कलक्टरों, पुलिस कमिश्नर एवं पुलिस अधीक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि वे कोविड-19 संक्रमण रोकने के लिए नाइट कर्फ्यू, शादी-ब्याह में अधिकतम 100 लोगों के शामिल होने, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाने सहित अन्य दिशा-निर्देशों की जमीनी स्तर पर सख्ती से पालना सुनिश्चित कराएं. मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राजस्थान के 8 जिला मुख्यालयों में रात्रिकालीन कपर्यू लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय इस महामारी से प्रदेशवासियों के जीवन की रक्षा करने के उद्देश्य से किया है. कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की रोकथाम हेतु लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की पालन को लेकर रविवार को सीएम आवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर ग्रुप एवं संबंधित जिला प्रशासन के साथ मुख्यमंत्री गहलोत ने चर्चा की. सीएम गहलोत ने सभी आठ जिलों के संभागीय आयुक्त, पुलिस कमिश्नर, पुलिस महानिरीक्षक, जिला कलेक्टर, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, सीएमएचओ तथा निजी अस्पतालॉं में कोरोना रोगियों के बेहतर प्रबंधन के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों से कहा कि वह लोगों का जीवन बचाने के लिए अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता से निभाएं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ऐसे समय में जबकि कोरोना संकरमण तेजी से फैल रहा है, विवाह समारोहों में अनुमत सीमा से अधिक संख्या में लोगों का जुटना संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहा है. इसको देखते हुए सीएम गहलोत ने इन आयोजनों में 100 से अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने पर लगने वाली जुर्माना राशि को 10 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने के निर्देश दिए हैं. यह भी पढ़ें: मंत्री अशोक चांदना का धमकाने वाला कथित ऑडियो हुआ जबरदस्त वायरल, नेशनल ट्रेंड में न02 पर रहा सीएम गहलोत ने कहा कि प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी बाजारों में जाकर यह सुनिश्चित करें कि वहां हैल्थ प्रोटोकॉल की अनिवार्य रूप से पालन हो. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विवाह कार्यक्रमों में निर्धारित संख्या से अधिक लोग नहीं जुटें, इसके लिए अधिकारी विवाह तिथि से पहले आयोजकों को समझाएं. आयोजकों द्वारा विवाह समारोह की वीडियोग्राफी करने को अनिवार्य किया जाए. साथ ही अधिक लोगों के एकत्र होने की सूचना या अंदेशा होने पर पुलिस एवं प्रशासन भी वीडियोग्राफी कराए. जीवन बचाना है सरकार का मकसद इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मास्क न लगाने पर भी जुर्माना राशि बढ़ाकर 500 रुपए की गई है. जुर्माना राशि बढ़ाने तथा वीडियोग्राफी के इन निर्णयों के पीछे सरकार का मकसद राशि वसूलना या समारोह में व्यवधान डालना नहीं बल्कि भीड़ के एकत्र होने एवं मास्क न पहनने के कारण फैलने वाले कोरोना संकमण से लोगों को बचाना है. मुख्यमंत्री गहलोत ने बताया कि बीते दिनों त्यौहारी सीजन, चुनाव, सर्दी के मौसम तथा विवाह आयोजनों के कारण प्रदेश में कोरोना संकमित रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. साथ ही रिकवरी रेट के बेहतर होने तथा मृत्यु दर के नियंत्रित होने के पालन में गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं. इसका कारण लोगों द्वारा मास्क नहीं लगाने तथा सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल का पालन नहीं करना है. ऐसी स्थिति को रोकना होगा. मुख्यमंत्री गहलोत ने आगे कहा कि निजी अस्पतालों में कोरोना रोगियों के उपचार के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. ये अधिकारी मरीजों, अस्पतालों तथा राज्य सरकार के बीच सेतु का काम करें. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान कोई परेशानी न हो. इसके साथ ही सीएम गहलोत ने कोरोना के विरूद्ध जन आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा 181 हेल्पलाइन का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए हैं. बता दें कि शनिवार रात को राजस्थान सरकार ने प्रदेश में कोरोना संकमण को नियंत्रित करने के लिए मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना राशि 200 रुपए से बढ़ाकर 500 रूपए करने तथा जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर उदयपुर अजमेर, अलवर तथा भीलवाड़ा जिला मुख्यालय की नगरीय सीमा में रात्रि 8 बजे से प्रातः 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लागू करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही 100 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यालयों में कार्मिकों की उपस्थिति 75 प्रतिशत तक सीमित रखने, कोविड का इलाज कर रहे निजी अस्पतालों में भी रोगी की मांग पर सरकारी कोविड अस्पतालों की तरह ही डे-केयर उपचार की अनुमति राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर करने तथा आवश्यकता होने पर निजी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने के लिए अधिगृहित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय किए थे.