’41 हजार से अधिक जर्जर स्कूल, मरम्मत केवल 2500 में’..विपक्ष को मिला सरकार को घेरने का मौका !

12 Feb 2026

झालावाड़ हादसे के बाद जर्जर स्कूल भवनों का बना था बड़ा मुद्दा, शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने कहा- 550 नहीं 1000 करोड़ रुपये खर्च होंगे, विपक्ष ने कहा- 41000 से ज्यादा स्कूल भवन जर्जर उनकी सुध कौन लेगा ?

राजस्थान बजट 2026-27 बीते दिवस विधानसभा में पेश किया गया. बजट में वित्तमंत्री दीया कुमार की शिक्षा विभाग के लिए की गयी घोषणा सबसे अहम और चौंकाने वाली रही. दरअसल झालावाड़ स्कूल त्रासदी के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी स्कूलों का आकलन कराया गया था. इनमें 41 हजार से अधिक विद्यालय जर्जर अवस्था में मिले थे, जिन्हें तत्काल जमींदोज करने या मरम्मत करने के निर्देश दिए गए थे. यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा था, क्योंकि घटना में 8 बच्चों की मौत हुई थी. लेकिन बजट भाषण में 41 हजार के मुकाबले महज 2500 स्कूल भवनों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए महज 550 करोड़ रुपए की घोषणा हुई है.

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अब इस मुद्दे को लेकर विपक्ष हमलावर है. कांग्रेस नेता जर्जर स्कूल भवनों को मुद्दा बना रहे हैं और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने स्पष्टीकरण दिया है कि इस कार्य के लिए 1000 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे है. हालांकि बजट में केवल 2500 स्कूलों को ही शामिल करने से विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया है. पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया, 'जर्जर स्कूल और क्लासरूम की मरम्मत के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है लेकिन आप क्या दे रहे हो. आपको शर्म आनी चाहिए.' शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने राज्य बजट को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि या तो विपक्ष ने बजट को ढंग से सुना नहीं है या फिर उन्हें समझ में नहीं आया. बजट में स्कूलों के लिए एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. उनके अनुसार जिन स्कूलों का जीर्णोद्धार होना है या जिन्हें चिह्नित कर आवश्यक श्रेणी में रखा गया है, उनके लिए यह राशि निर्धारित की गई है. मदन दिलावर ने भी माना कि ये राशि कम है लेकिन इसी सत्र में स्कूल भवनों पर 1000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

दरअसल, 2500 जर्जर स्कूलों के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत के अलावा 300 भवन विहीन और जर्जर स्कूलों के भवनों का 450 करोड़ रुपए लागत से निर्माण कराया जाना है, जिसकी घोषणा भी बजट में की गयी है. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि जर्जर भवनों और कक्षा कक्षों की मरम्मत के लिए 1000 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं लेकिन ये काम महज 2800 विद्यालयों में किया जाना है. शेष 38,200 सरकारी स्कूल भवनों का क्या होगा ?

वहीं, अब बीजेपी नेता स्कूल भवनों के इन हालात के लिए पूर्ववर्ती गहलोत सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार ने स्कूल बिल्डिंग्स की सुध नहीं ली. इसके चलते ये हालात हुए हैं.