उम्मीदों पर फिरा पानी, जनता में निराशा- राजस्थान बजट 2026 पर गहलोत का तंज

11 Feb 2026

अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार के तीसरे बजट को जनता और युवाओं के लिए निराशाजनक बताया, बड़े वादे अधूरे, सरकारी योजनाओं और भर्ती पर लगी रोक को बताया गंभीर समस्या

Ashok Gehlot's big statement on Rajasthan budget: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने आज अपने कार्यकाल का तीसरा बजट पेश किया, वित्त मंत्री दीया कुमारी ने करीब 2 घंटे 54 मिनट के बजट भाषण में सरकारी कर्मचारियों, किसानों के साथ हेल्थ सेक्टर, पेयजल, ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कई घोषणाएं कीं. वही कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे निराशाजनक और प्रदेश की जनता के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ाने वाला करार दिया. गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार के बजट में कोई ऐसी घोषणा नहीं की गई जिसे व्यापक जनहित में माना जा सके. उन्होंने बताया कि समाज का हर वर्ग इस बजट को देखकर हताश और निराश होगा.

बड़े प्रोजेक्ट्स और सामाजिक सुरक्षा की अनदेखी

गहलोत ने कहा कि बजट में रिफाइनरी और ERCP जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र तक नहीं है, जबकि पिछले बजट में रिफाइनरी के उद्घाटन का वादा अगस्त 2025 तक किया गया था. उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी न होने पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे 90 लाख से अधिक लाभार्थियों में निराशा फैली है.

यह भी पढ़े: बीजेपी के मंत्रियों से बोले राहुल- ‘आइए साथ में मीडिया से करें बात’, तो वहाँ से खिसक लिए दोनों मंत्री

युवाओं और कर्मचारियों के लिए कोई बड़ी राहत नहीं

पूर्व मुख्यमंत्री ने पांच साल में 4 लाख नौकरियों की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं के लिए कोई बड़ी भर्ती न होने की आलोचना की. संविदा भर्तियों और स्टेट टेस्टिंग एजेंसी (STA) के गठन को उन्होंने भाजपा सरकार की ध्यान भटकाने की रणनीति बताया. इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों और पत्रकारों के लिए बजट में कोई ठोस घोषणा न होना भी गहलोत की आलोचना का केंद्र रहा.

नए जिलों और जल कनेक्शन में विफलता

गहलोत ने नए जिलों में मिनी सचिवालय और बुनियादी ढांचे को लेकर भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बजट में 45 लाख नल कनेक्शन लगाने का वादा था, लेकिन दो साल में केवल 14 लाख ही लगाए जा सके. उनका कहना था कि यह सरकार की खुली असफलता है.

कांग्रेस बनाम भाजपा: धरातल पर फर्क

अशोक गहलोत ने निष्कर्ष निकाला कि कांग्रेस सरकार में घोषणाएं धरातल पर उतरती थीं, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार में घोषणाएं तो हैं लेकिन काम जमीन पर नहीं दिखाई दे रहा. उनका कहना था कि यही इस बजट की सबसे बड़ी विफलता है और जनता को इससे निराशा ही हाथ लगी.