



नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने की राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देने, अंतर्राज्यीय जल विवादों का निस्तारण करने व पेपर लीक मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा, बजट को बताया 'कॉरपोरेट घरानों का बजट'
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बजट 2026-27 में राजस्थान की अनदेखी करने और आमजन की अपेक्षाओं पर न खरा उतरने को लेकर केंद्र की एनडीए सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि बजट आम जनता का नहीं, वरन् कुछ गिने-चुने कॉरपोरेट घरानों का बजट बनकर रह गया है. उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस बजट में रोजगार सृजन के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है. प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती में देरी और खाली पड़े लाखों सरकारी पदों पर सरकार की चुप्पी युवाओं के साथ अन्याय है.
लोकसभा में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत आम बजट पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए सांसद बेनीवाल ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, 'देश का युवा आज सबसे बड़ा सवाल पूछ रहा है – नौकरी कहां है? रोजगार सृजन के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है. प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती में देरी और खाली पड़े लाखों सरकारी पदों पर सरकार की चुप्पी युवाओं के साथ अन्याय है, एसएससी जैसी परीक्षाओ में हुई अनियमितताओं पर सरकार ने चुपी साध ली जो दुर्भाग्यपूर्ण है. देश में करोड़ों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं. सरकारी विभागों में लाखों पद खाली हैं, लेकिन उन्हें भरने की कोई समयबद्ध योजना इस बजट में नहीं है.'
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सांसद बेनीवाल ने कहा कि बजट में स्टार्टअप और स्किल की बातें जरूर की गईं, लेकिन स्थायी रोजगार कैसे मिलेगा, इसका जवाब भी बजट में नहीं है. बेनीवाल ने सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों को भरने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने व सीएसआर की राशि के व्यय की लिए ठोस निगरानी प्रणाली बनाने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि एनपीएस को सरकार सुधार बताया रही है लेकिन सच्चाई यह है कि इसने कर्मचारियों की रिटायरमेंट सुरक्षा को जुए में डाल दिया है. सम्मानजनक और निश्चित जीवन वाली पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) में को NPS ने बुढ़ापे को बाजार के भरोसे छोड़ दिया है. उन्होंने पैरा मिल्ट्री सहित तमाम केंद्रीय कार्मिकों के लिए ओपीएस बहाल की मांग की.
सरकार के पास नहीं रोडमैप
नागौर सांसद ने सरकार को घेरने हुए कहा कि यह बजट देश के गरीब, किसान, मजदूर, युवा और मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतरता. सरकार हर साल 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा देती है, लेकिन लगातार हम इस सरकार के बजट को देख रहे है उससे यह प्रतीत हो गया है कि बजट कुछ गिने-चुने कॉरपोरेट घरानों का बजट बनकर रह गया है, आम जनता का नहीं. सांसद ने कहा कि यह बजट अमीर–गरीब की खाई बढ़ाने वाला बजट है क्योंकि कॉरपोरेट सेक्टर को तो सरकार रियायतें दे रही है लेकिन आम नागरिक पर अप्रत्यक्ष करों का बोझ डाला जा रहा वहीं आर्थिक असमानता कम करने और उच्च और बहु- कराधान की प्रणाली में सुधार करने का कोई ठोस विजन केंद्र के पास नहीं है.
राजस्थान को विशेष राज्य के दर्जे की मांग
आरएलपी प्रमुख ने लोकसभा में भौगौलिक स्थिति और विपरीत हालातों को देखते हुए राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग भी उठाई. इसके अलावा, राजस्थान के अंतराजीय जल विवादों का निस्तारण करने के लिए पंजाब व गुजरात से राजस्थान को हिस्से का पानी दिलवाने, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी सहित पश्चिमी राजस्थान में पेयजल व सिंचाई हेतु चिनाब के जल को लाने के लिए ईआरसीपी की तर्ज पर डब्ल्यूआरसीपी योजना बनाकर विशेष बजट आवंटित किए जाने, नागौर संसदीय क्षेत्र के डीडवाना- कुचामन जिले के मकराना में मार्बल की अंतराष्ट्रीय मंडी स्थापित करने हेतु योजना तैयार करने, नागौर की हवाई पट्टी के विस्तार व अपग्रेडेशन हेतु बजट आवंटन, नागौर की विश्व विख्यात पान मैथी सहित राजस्थान के 40 से अधिक उन सभी उत्पादों को जीआई टैग दिए जाने, नागौर में केंद्रीय शुष्क कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना, संसदीय क्षेत्र नागौर के डीडवाना -कुचामन जिले के कुचामन में सेंटल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्वीकृति, नागौर संसदीय क्षेत्र में खींवसर तथा परबतसर में शीघ्रता से अटकी हुई केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति, डीडवाना में स्वीकृत केंद्रीय विद्यालय का संचालन शीघ्र शुरू करने, नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र में टंगस्टन व लिथियम के खनन हेतु शीघ्रता से कार्य किए जाने, खनन नीति में बदलाव करके किसानों को छोटे पट्टे दने, तथा सांसद कोष बढ़ाकर 25 करोड़ करने और अरावली पर्वतमाला का संरक्षण करने की मांग भी सांसद बेनीवाल ने सदन में उठाई.
आमजन पर महंगाई की मार
हनुमान बेनीवाल ने देश में लगातार बढ़ती महंगाई पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. सोने और चांदी के भाव देखकर लग रहा है कि सरकार का इन पर कोई नियंत्रण ही नहीं रहा लेकिन इन तमाम हालातों के बावजूद इस बजट में महंगाई से राहत देने का कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है. बेनीवाल ने एमएसपी पर खरीद को कानूनी गारंटी देने की मांग करते हुए कहा कि कृषि लागत बढ़ रही है, खाद-बीज महंगे हो रहे हैं, लेकिन किसानों की आय दोगुनी करने का वादा फिर एक जुमला बनकर रह गया है. उन्होंने राजस्थान सहित देश के किसानों की सम्पूर्ण कर्ज माफी की माफी का मुद्दा भी सदन में उठाया. अब देखना होगा कि सरकार उनकी बातों को कितना मंजूर कर पाती है


