



सुप्रीम कोर्ट का बिहार चुनाव रद्द करने की याचिका पर सुनवाई से इनकार, कहा- पटना हाईकोर्ट में दायर करे याचिका, 242 सीटों पर चुनाव लड़ा था एक भी सीट पर चुनाव नहीं जीती जनसुराज पार्टी
सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार चुनाव रद्द करने की जन सुराज की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. पार्टी ने सरकार पर आचार संहिता के उल्लंघन और महिलाओं को पैसे बांटकर वोटरों को लुभाने का आरोप लगाया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करने से इनकार करते हुए पटना हाईकोर्ट में जाने की सलाह दी है. पार्टी का आरोप था कि सरकार ने वोटरों को लुभाने के लिए कल्याणकारी योजना का गलत इस्तेमाल किया है. इसी आधार पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती दी गई थी. प्रशांत किशोर की पार्टी ने राज्य में फिर से चुनाव कराने की मांग की थी.
बिहार चुनाव को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है. प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज कथित फ्रीबीज को लेकर बिहार चुनावों को रद्द करने की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाई और कहा कि हारी हुई पार्टी के कहने पर अदालतों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. प्रशांत किशोर की जनसुराज की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने को कहा. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जब लोग आपको रिजेक्ट कर देते हैं, तो क्या आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट में दी ये दलीलें
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जब राज्य में आचार संहिता लागू थी उस दौरान महिलाओं को 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किये गए. इस पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह महिलाओं की सहायता के लिए जारी राशि का हिस्सा था. सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत किशोर की पार्टी की तरफ से एडवोकेट चंद्र उदय सिंह ने दलीलें दी. उन्होंने कहा कि यह तय समय पर सोच समझकर किया गया और यह सभी महिलाओं को इसका लाभ दिया गया जिनके पति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि चुनाव याचिका में एक चुनाव को मुद्दा बनाया जाता है. आप तो एक ही याचिका में पूरा चुनाव रद्द करने की बात कर रहे हैं.
एक भी सीट पर चुनाव नहीं जीती जनसुराज पार्टी
प्रशांत किशोर की पार्टी के तरफ से पेश वकील ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है. अदालत को इसमें हस्तक्षेप कर जवाब तलब करना चाहिए. लेकिन सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने साफ कर दिया कि हम नोटिस जारी नहीं कर सकते हैं. आपको बता दें कि प्रशांत किशोर की पार्टी ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में 243 विधानसभा सीटों में से 242 पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट जीतने में नाकाम रही.
सुप्रीम कोर्ट ने दी ये सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपको कितने वोट मिले ? जब लोग आपको नकार देते हैं, तो आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं. उस समय ही योजना को चुनौती देनी चाहिए थी. आप बस चुनाव को रद्द घोषित करवाना चाहते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर फैसला करने के लिए हाईकोर्ट सही मंच है. सीजेआई ने कहा चूंकि यह सिर्फ एक राज्य से जुड़ा मामला है, इसलिए हाईकोर्ट में जाएं. कुछ मामलों में मुफ्त योजनाओं का गंभीर मुद्दा है जिसकी हम गंभीरता से जांच करेंगे. जनसुराज की दलील: जन सुराज पार्टी की ओर से सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने कहा कि जिस योजना के तहत मतदाताओं को भुगतान किया गया था, उसे चुनावों से ठीक पहले घोषित किया गया था. भुगतान तब किया गया जब आचार संहिता लागू थी और आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद 35 लाख से ज़्यादा लोग इस योजना में नामांकित हो गए.
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- हम मुफ्त योजनाओं के मुद्दे पर विचार करेंगे. लेकिन हमें इसके पीछे इंटेशन भी देखना होगा. किसी ऐसी पार्टी के कहने पर ऐसा नहीं कर सकते जो अभी-अभी चुनाव हारी है. जब आप सत्ता में आएंगे, तो आप भी ऐसा ही करेंगे. सुप्रीम कोर्ट की फटकार और कड़ी टिप्पणियों के बाद जनसुराज पार्टी ने याचिका वापस ले ली.


