महाराष्ट्र की राजनीति में नया ट्विस्ट: ‘दादा’ के जाने के बाद बदल रहा एनसीपी का मूड!

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2 Feb 2026

आगामी दिनों में दोनों गुटों के बीच संवाद की संभावना लेकिन मौजूदा बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि फिलहाल दूरी कम होने के बजाय रणनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश

Maharashtra Politics: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया अजित पवार के जाने के बाद लग रहा है कि पार्टी का मूड बदल रहा है. जहां एक ओर निकाय चुनाव में गठबंधन करने के बाद एकबारगी लगने लगा था कि अब पार्टी अपने पुराने स्वरूप (एकजुट एनसीपी) में लौटने के लिए तैयार है, वहीं अजित 'दादा' के जाने के बाद यह विलय दूर की कोड़ी लग रहा है. अजित की धर्मपत्नी सुनेत्रा पवार के विधायक दल का नेता और उसके बाद प्रदेश की डिप्टी सीएम बनने के बाद शरद पवार को भी जोर का झटका लगा है. इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री और एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता का हालिया बयान भी एनसीपी और एनसीपी एसपी के विलय पर रोक लगाते से प्रतीत होते हैं.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज करते हुए कहा, 'यदि एनसीपी के मर्जर की बात फाइनल स्टेज तक पहुंच चुकी थी तो अजित दादा उन्हें जरूर बताते. सरकार को न तो किसी चर्चा की जानकारी है और न ही विलय की किसी तारीख की.' सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया कि कुछ लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. अजित पवार बिना बीजेपी और गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लिए कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकते.

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सीएम फडणवीस का बयान एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय की घोषणा तय थी.
इधर, एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता अध्यक्ष सुनील तटकरे ने भी बयान देते हुए कहा, 'उनकी पार्टी का एनडीए के साथ रहने का फैसला पूरी तरह मजबूत और कायम है. जो नेता भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ रहना चाहते हैं, वे उसी के अनुरूप अपने फैसले लें.' उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी-एसपी की ओर इशारा और एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय के खिलाफ भी माना जा रहा है.

तटकरे ने अपने बयान से स्पष्ट संकेत दिया कि दोनों दलों के एकीकरण का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए शरद पवार गुट को अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की राजनीतिक लाइन स्वीकार करनी होगी.

इधर, सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि दोनों गुटों के बीच संभावित बातचीत को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. शरद पवार गुट की ओर से अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. माना यही जा रहा है कि किसी भी संभावित विलय की स्थिति में एनसीपी अब अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ना चाहेगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों के बीच संवाद की संभावना बनी रह सकती है. हालांकि मौजूदा बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि फिलहाल दूरी कम होने के बजाय रणनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं.