



एकजुट एनसीपी की बागड़ोर संभालने पर सस्पेंस जारी, शरद पवार का मार्गदर्शक की भूमिका तय, अजित पवार ने ही तय किया था इस विलय का रोडमैप, सरकार में भी बनी रहेगी पार्टी
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर एक बार इतिहास बदलने वाला है. अजित पवार की एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी एसपी पार्टी फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौटेगी. इसकी नींव अजित पवार पहले ही रख चुके थे और पठकथा लिखी जा चुकी थी. कमोबेश अजित पवार ऐसा होते हुए देख नहीं सके. 28 जनवरी को एक विमान हादसे में उनका निधन हो गया. इस विलय का ऐलान 9 फरवरी को किया जा सकता है. सवाल है तो केवल एक : एकजुट एनसीपी की बागड़ोर संभालेगा कौन?
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सूत्रों के अनुसार, दोनों पार्टियों के विलय रोडमैप खुद अजित पवार ने बनाया था. निकाय चुनाव में 'दोनों का एक साथ एक मंच पर आना और चुनाव लड़ना' इसी सतत प्रक्रिया का अहम हिस्सा था. जिला परिषद चुनाव का रिजल्ट आने के बाद दोनों गुटों के विलय की घोषणा हो सकती है. अजित के निधन के बाद भी दोनों पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठकें बदस्तूर जारी है. पार्टी की कमान संभालने के लिए अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को आगे किया गया है लेकिन प्रफुल्ल पटेल की दावेदारी से खींचतान की स्थिति बन रही है. ऐसे में शरद पवार का कार्यकारी मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आना तय है.
महायुति में बनी रहेगी एनसीपी?
इस विलय के बाद दूसरा सबसे बड़ा सवाल है कि एनसीपी विलय के बाद भी सरकार में बनी रहेगी. इसका जवाब है - हां. इस संबंध में भी अजित पवार की पहले ही बीजेपी आलाकमान से बात हो चुकी है और बीजेपी की इस बारे में सहमति भी है. सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम का पद मिलना तय है. इसके बाद विपक्ष का महाविकास अघाड़ी के टूटने की विधिवत शुरूआत भी हो जाएगी. हालांकि निकाय चुनावों में एमवीए में शामिल शिवसेना यूबीटी, कांग्रेस और एनसीपी एसपी, तीनों ने अलग अलग चुनाव लड़ा था. कांग्रेस को भी इस विलय की भनक थी. शायद यही वजह रही कि उन्होंने अलग चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया.
9 फरवरी को ही विलय क्यों?दरअसल इसके पीछे शरद पवार का दिमाग है. महीने भर पहले से ही दोनों पार्टियों के विलय के कयास आने लगी थे. जब रिस्पॉन्स ठीक आया, तब बात आगे बढ़ाई. 5 फरवरी को महाराष्ट्र की 12 जिला परिषदों के चुनाव होने हैं और 7 फरवरी को रिजल्ट आना है. रणनीति यह थी कि पहले चुनाव खत्म होने दें क्योंकि पुणे जिला परिषद अजित पवार का गढ़ रहा है. मीटिंग में तय हुआ कि शरद गुट के कैंडिडेट भी अजित पवार की एनसीपी के सिंबल 'घड़ी' पर ही चुनाव लड़ेंगे. मैसेज दिया जाएगा कि अब दोनों पवार साथ आ रहे हैं. इसके बाद ही अनाउंसमेंट होगा. अब अजित पवार के निधन के बाद स्थितियां बदल गईं हैं. इसके बाद भी जैसा कि हमारी पिछली खबर में दावा किया जा चुका है: दोनों चाचा-भतीजे की तूताड़ी-घड़ी का साथ आना तय है.


