राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में ‘दि राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इम्मूवेबल प्रोपर्टी एण्ड प्रोविजन फोर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेन्ट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026’ के प्रारूप को मंजूरी दी गई. इस बिल को लेकर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है. बिल पर सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बिल को लेकर कहा कि इसके पारित होने के बाद राज्य में अशांत क्षेत्रों में स्थाई निवासियों की सम्पत्तियों एवं उक्त सम्पत्तियों पर किरायेदारों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जा सकेगा एवं राज्य में सामुदायिक सद्भावना एवं सामाजिक संरचना कायम रखी जा सकेगी. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस बिल को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार ने कैबिनेट बैठक में डिस्टर्ब एरियाज बिल 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है. यह भाजपा के राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए है. इस बिल की भाषा ही संवैधानिक नहीं है. यह केवल राजनीतिक एजेंडा की भाषा है.
सामुदायिक सद्भावना एवं सामाजिक संरचना बनाए रखने में सहायक होगा विधेयक—पटेल
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इस बिल के प्रारूप को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित हुई प्रेसवार्ता में कहा कि जनसंख्या असंतुलन की स्थिति बनने से सार्वजनिक व्यवस्था, सद्भाव एवं मेलजोल से रहने के सामुदायिक चरित्र पर प्रभाव पड़ता है. ऐसे क्षेत्रों में दंगे, भीड़ द्वारा हिंसा से अशांति की परिस्थिति उत्पन्न होने पर उस क्षेत्र के स्थायी निवासियों को अपनी स्थायी सम्पतियां कम दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है. ऐसे क्षेत्र विशेष को अशांत क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति के बिना वहां अचल संपत्ति के हस्तांतरण को अमान्य एवं शून्य माना जाएगा. सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति से ही अचल संपत्ति का हस्तांतरण इच्छुक व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा. विधेयक के इन प्रावधानों का उल्लंघन करने पर कारित अपराध गैर जमानती और संज्ञेय होगा जिसमें 3 वर्ष से 5 वर्ष तक कारावास और अर्थदण्ड की सजा देय होगी. इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य में अशांत घोषित क्षेत्रों में स्थाई निवासियों की सम्पत्तियों एवं उक्त सम्पत्तियों पर किरायेदारों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जा सकेगा. राज्य में सामुदायिक सद्भावना एवं सामाजिक संरचना कायम रखी जा सकेगी. इस विधेयक को अब विधानसभा के आगामी सत्र में रखा जाएगा.
बिल का उद्देश्य राजस्थान जैसे शांत प्रदेश को अशांत करने की एक साजिश—डोटासरा
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस बिल को लेकर गर्म लहजे में कहा कि भाजपा सरकार ने कैबिनेट बैठक में डिस्टर्ब एरियाज बिल 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है. यह बिल भाजपा के राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए है. इस बिल की भाषा ही संवैधानिक नहीं है. यह केवल राजनीतिक एजेंडा की भाषा है. प्रदेश में भाजपा की सरकार पर्ची से बनी है. प्रदेश की जनता भी इन्हे पर्ची सरकार कहती है. भजनलाल सरकार ने केन्द्र से आई हुई गुजरात की पर्ची प्राप्त करके यह बिल बनाया है. गुजरात मॉडल के रूप में यह बिल आया है जिसका उद्देश्य दंगा रोकना नहीं बल्कि राजस्थान जैसे शांत प्रदेश को अशांत करने की एक साजिश है. इस बिल की भाषा प्रदेश में केवल अशांति पैदा करने के लिए है, जिससे जनता के मुद्दे पर चर्चा ना हो और प्रदेश में डर का माहौल बने. प्रदेश के लोगों का ध्यान भटकाने के लिये यह बिल लाया गया है और सरकारी गुंडागर्दी को वैधानिक जामा पहनाने की एक कोशिश है.
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यह बिल केवल भाजपा का राजनीतिक एजेंडा—डोटासरा
डोटासरा ने कहा कि सरकार पहले किसी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित करेगी, फिर शहर को करेंगे, उसके बाद पूरे प्रदेश को अशांत बनाएंगे. आईपीसी में शांति बहाली के लिए पहले से ही कानून है. प्रदेश में अधिकारी राज लाकर भाजपा की प्रदेश सरकार लोकतंत्र पर प्रहार कर रही है. इस प्रकार का बिल पूर्ण रूप से संविधान का उल्लंघन है. संविधान के अनुच्छेद 300ए में हर व्यक्ति को अपनी संपत्ति पर अधिकार है. उसे वंचित करने का यह षड्यंत्र है. संविधान में अनुच्छेद 14 में सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त है. यह बिल उसका भी उल्लंघन करता है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत यह बिल नागरिकों के अधिकारों के विरुद्ध लाया गया है. जनसंख्या असंतुलन कोई कानूनी शब्द नहीं है. डिस्टर्ब एरिया किस आधार पर घोषित होगा इसका कोई उल्लेख नहीं है. यह केवल भाजपा का राजनीतिक एजेंडा है. उसे आगे बढ़ाने के लिए यह कानून लाया गया है और सांप्रदायिक सद्भाव प्रदेश का खत्म कर गुजरात की तरह यहां भी डर का माहौल बनाकर भाजपा सत्ता में बने रहना चाहती है. लोग मूलभूत अधिकारों और सरकार की नाकामियों पर चर्चा नही करें, उससे ध्यान भटकाने के लिए यह बिल लाया गया है.
बिल को लेकर सदन से सड़क तक की लड़ाई लड़ेगी कांग्रेस—डोटासरा
डोटासरा ने आगे सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा कानून-व्यवस्था कायम रखने में नाकाम रही है और अब प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकरूपता को खंडित करने के लिए अपने एजेंडे के तहत गुजरात मॉडल के आधार पर केन्द्र से प्राप्त पर्ची पढक़र यह बिल लाई है. देश भर में सबसे शांत कहे जाने वाले राजस्थान प्रदेश में जहां सभी आपसी सौहार्द के साथ रहते हैं. इस बिल के माध्यम से विभाजन करने का उद्देश्य भाजपा का है. भाजपा सरकार प्रदेश में जनप्रतिनिधियों से ऊपर अधिकारियों को अधिकार देना चाहती है. यह लोकतंत्र की परंपराओं और सिद्धांतों के विपरीत है. इस बिल के आने से प्रदेश में निवेश करने वाले दूर हटेंगे, प्रदेश का विकास रूकेगा, व्यापार घटेगा, लोगों के जमीनों के दाम घटेंगे और समाज में बांटने का काम भाजपा करेगी. प्रदेश का सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ेगा और सक्षम अधिकारी असीमित अधिकारों के साथ आम नागरिकों के मूलभूत संवैधानिक अधिकारों का हनन करेंगे. कांग्रेस पार्टी आने वाले विधानसभा सत्र में भाजपा के इस संविधान के प्रावधानों के विपरीत बनाए गए बिल का पुरजोर विरोध कर भाजपा सरकार की नाकामियों को एक्सपोज करेगी. कांग्रेस पार्टी जनता के अधिकारों के लिए सदन से सडक़ तक की लड़ाई लड़ेगी