शिंदे सेना को सताया ‘जैसे को तैसा’ का डर, ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के डर से 5 स्टार होटल में शिफ्ट किए पार्षद

shinde
17 Jan 2026
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद हलचल तेज हो गई है. बीएमसी चुनाव परिणाम में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. लेकिन बीजेपी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. शिंदे गुट की शिवसेना अब इस चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में हैं. वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना को चुनाव परिणामों से तगड़ा झटका लगा है. बीएमसी में बीजेपी का सत्तासीन होना तय है लेकिन 3 साल पहले हुए एक घटनाक्रम ने शिंदे गुट की शिवसेना की अब रातों की नींद उड़ा रखी है. लगभग साढ़े 3 साल पहले आया था सियासी भूचाल आपको याद दिला दें कि करीब साढ़े 3 साल पहले जब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार सत्ता में थी. तब एक राजनीतिक भूचाल आया. शिवसेना के इतिहास की सबसे बड़ी बगावत हुई. इस बगावत के बाद उद्धव ठाकरे को राजनीतिक रूप से बड़ा नुकसान हुआ. उद्धव ठाकरे के सीएम रहते शिवसेना पार्टी टूट गई और ठाकरे सरकार गिर गई थी. उद्धव ठाकरे के हाथ से पहले सत्ता छूटी और फिर पार्टी का नाम और निशान भी छूट गया. चुनाव आयोग के फैसले के बाद शिवसेना की कमान एकनाथ शिंदे के हाथों में आ गई. अब एकनाथ शिंदे को डर है कि ठाकरे बंधु जैसे को तैसा की नीति अपनाकर हॉर्स ट्रेडिंग के जरिये पार्टी में सेंध ना लगा दे. अब एकनाथ शिंदे को ठाकरे बंधुओं के एक साथ आने से पार्टी में फूट और हॉर्स ट्रेडिंग का डर सता रहा है. शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पेश किया गया एक प्रस्ताव इस बात की ओर इशारा करता है. किंगमेकर की भूमिका में आई एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने पार्टी में फूट और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के चलते अपने पार्षदों को मुंबई के फाइव स्टार होटल ताज लैंड्स एंड होटल में ठहराने का फैसला किया है. एकनाथ शिंदे को यही डर है कि ठाकरे बंधु 'जैसा को तैसा' की कहावत को चरितार्थ ना कर दे. महाविकास अघाड़ी सरकार में बगावत 21 जून 2022 को एकनाथ शिंदे कई शिवसेना विधायकों के साथ सूरत चले गए थे 29 जून 2022 को उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया 30 जून 2022 को एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने शिवकोष शिवसेना विश्वस्त संस्था की स्थापना शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बीते दिनों हुई. इसमें कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए. इनमें से 'शिवकोष शिवसेना विश्वस्त संस्था' की स्थापना का प्रस्ताव सबसे महत्वपूर्ण है. दरअसल उद्धव ठाकरे को पार्टी में फूट के कारण बहुत बड़ा नुकसान हुआ था. ज्यादातर विधायक और सांसदों ने उनका साथ छोड़ दिया था, कई नेता भी शिंदे गुट में चले गए. इसके बाद शिवसेना के कई मध्यवर्ती कार्यालयों और शाखाओं पर शिंदे गुट के नेताओं ने अपना दावा जताया. इससे ठाकरे और भी मुश्किल में आ गए. शिवसेना को क्या होगा फायदा ? शिवसेना के मध्यवर्ती कार्यालय और शाखाएं अब 'शिवकोष शिवसेना विश्वस्त संस्था' के तहत आएंगे. इनका प्रबंधन विश्वस्त संस्था द्वारा किया जाएगा. पार्टी निधि, जरूरतमंदों को मदद और पार्टी की ओर से आयोजित किए जाने वाले अन्य कार्यक्रमों का आयोजन संस्था द्वारा किया जाएगा. पार्टी द्वारा किए जाने वाले सामाजिक काम भी ये संस्था ही करेगी. इसका मतलब है कि पार्टी के सभी महत्वपूर्ण काम और संपत्ति अब इस संस्था के अधीन होंगे. ताकि भविष्य में किसी भी तरह की फूट से पार्टी को बचाया जा सके और ऐसी स्थिति में शिंदे गुट को ठाकरे की तरह ज्यादा नुकसान ना उठाना पड़े.