



तेजस्वी का एकाएक इस तरह सार्वजनिक आकर धरना प्रदर्शन करना, दोनों भाईयों की एक साथ एक मंच पर उपस्थिति होना, नाराजगी के बाद महागठबंधन के मुकेश साहनी का साथ में आना कई बातें हैं जो इस एक घटनाक्रम में घटित हो गयी. अब तेजस्वी ने ये राजनीति में वापस सक्रियता दिखाने के लिए किया या फिर अपने पिता लालू प्रसाद यादव की पितृभक्ति के वशीभूत होकर, ये तो पता नहीं लेकिन तेजस्वी के इस कदम से नीतीश कुमार के कान खड़े जरूर हो गए होंगे. हालांकि तेजप्रताप का राजनीति में वो कद नहीं है जो होना चाहिए लेकिन फिर भी दोनों भाईयों का एक मंच पर एक साथ खड़े होकर संघर्ष करना महागठबंधन को फिर से एकजूट करने में कारगर हो सकता है. घटना स्थल पर मुकेश सहनी का पहुंचना और साथ देना इस बात की पुष्टि नहीं करता लेकिन संकेत तो दे ही रहा है.बिना आदेश दिखाए दुग्ध मार्केट तोड़ने के विरुद्ध बारिश में 8 घंटा धरने देने के बाद सुबह 3 बजे प्रशासन ने लिखित में दूध व्यवसायियों के लिए यथाशीघ्र पूर्व जैसी व्यवस्था सुनिश्चित करने का वादा किया है। लड़ते रहे है, लड़ते रहेंगे। सत्ता नहीं ग़रीबों के लिए संघर्ष ही हमारी राजनीति है। pic.twitter.com/f99W7URDWo
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) August 21, 2019


